द फॉलोअप डेस्क
विधानसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सरकारी संसाधनों का जिस तरह इस्तेमाल किया जाता है, उस पर अक्सर सवाल नहीं उठते। लेकिन बिहार के गयाजी जिले में सामने आया मामला इस सोच को झकझोर देता है। दैनिक भास्कर अखबार की इन्विस्टिगेटिव रिपोर्ट का दावा है कि गयाजी पुलिस ने चुनाव ड्यूटी के दौरान डीजल आपूर्ति के नाम पर फर्जी बिल बनाकर करीब 52 लाख रुपये का घोटाला किया।.jpeg)
रिपोर्ट की मानें तो यह पूरा मामला तब सामने आया, जब डीजल खपत से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। कागजों में जो दिखाया गया, वह जमीनी हकीकत से बिल्कुल उलट निकला। टैंपो में 180 लीटर डीजल के बिल से पोल खुली। जांच की शुरुआत एक ऐसे रिकॉर्ड से हुई, जिसमें दावा किया गया कि एक टैंपो में एक ही बार में 180 लीटर डीजल भरवाया गया। तकनीकी रूप से यह संभव ही नहीं है, क्योंकि टैंपो की टंकी की क्षमता इससे कहीं कम होती है।
दस्तावेजों के अनुसार, BR 02 PA 7558 नंबर के टैंपो में 28 अक्टूबर 2025 को 180 लीटर डीजल की आपूर्ति दिखाई गई। यही एंट्री पूरे मामले की पहली बड़ी लाल झंडी बनी। इसके बाद जब अन्य वाहनों की जांच हुई, तो एक के बाद एक चौंकाने वाली बातें सामने आने लगीं। एक ही दिन, दो-दो बार डीजल भरवाने का खेल खेलने में रिकॉर्ड बताते हैं कि 31 अक्टूबर 2025 को BR02BR4090, BR02BR4690 समेत कई वाहनों में डीजल भरवाने की एंट्री की गई।
कुछ मामलों में तो एक ही गाड़ी में एक ही दिन दो से तीन बार डीजल भरवाने की खपत दर्शाई गई। नियमों के मुताबिक, यह न सिर्फ असंभव है बल्कि सीधे तौर पर फर्जीवाड़े की श्रेणी में आता है। चुनावी ड्यूटी की आड़ में 8 नवंबर 2025 को चुनाव ड्यूटी में लगे 14 चार पहिया वाहन और 24 छोटे वाहन के नाम पर ईंधन खपत दिखाई गई। एमटी साउंड (मोटर ट्रांसपोर्ट सेक्शन) के अधियाचन पर करीब साढ़े तीन हजार लीटर डीजल की आपूर्ति दर्शाई गई और उसका पूरा भुगतान भी उठा लिया गया।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 10 अक्टूबर 2025 से 24 नवंबर 2025 के बीच लगातार फर्जी बिल बनाकर लगभग 62 लाख लीटर डीजल की काल्पनिक खपत दिखा दी गई। जांच आगे बढ़ी तो मामला और गंभीर हो गया। कुछ ऐसे वाहनों के नाम पर भी डीजल आपूर्ति दिखाई गई, जो जांच में कहीं मौजूद ही नहीं पाए गए।.jpg)
उदाहरण के तौर पर MH 04 AA 9644 में 1 नवंबर 2025 को 178 लीटर, 2 नवंबर 2025 को 15 लीटर डीजल दिखाया गया। इसी तरह, BR02TC8085 में 30 अक्टूबर 2025 को 50 लीटर डीजल की आपूर्ति दर्ज है। रिकॉर्ड में आगे कई वाहन नंबर दर्ज हैं, जिनके नाम पर भी डीजल की निकासी दिखाई गई। इस पूरे घोटाले में एमटी साउंड (Motor Transport Section) और मुंशी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि पुलिस विभाग के अंदर बैठे कुछ कर्मियों ने पेट्रोल पंप संचालकों से सांठगांठ कर फर्जी डीजल बिल तैयार किए, और सरकारी खजाने से भुगतान निकलवा लिया। कई मामलों में यह भी सामने आया कि जिन वाहनों के नाम पर डीजल दिखाया गया, वे उस वक्त न तो कैंप में थे और न ही चुनाव ड्यूटी में सक्रिय।.jpeg)
जांच और दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद अनुमान लगाया गया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिए करीब 52 लाख रुपये का गबन किया गया। बड़ा सवाल है कि क्या चुनाव ड्यूटी के नाम पर सरकारी खजाने को लूटा गया? और अगर हां, तो क्या जिम्मेदारों पर वास्तविक कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर एक और आंकड़ा बनकर रह जाएगा?