द फॉलोअप डेस्क
बिहार में एक बार फिर से कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। चुनावी साल में यह विस्तार खासकर जातिगत समीकरण साधने के प्रयासों के तौर पर देखा जा रहा है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र से पहले नीतीश कुमार के नेतृत्व में कैबिनेट में कई नए चेहरे जुड़ने जा रहे हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता प्रमुख रूप से शामिल होंगे। इस विस्तार के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा भी सुर्खियों में है, जिस पर राजद ने कई तंज कसे हैं, खासकर उनके इस्तीफे में हुई गलतियों को लेकर।
कैबिनेट में शामिल होने वाले नामों पर गौर करें तो इनमें BJP के कई प्रमुख चेहरे हैं जो बिहार के जातिगत समीकरणों को संतुलित करने के उद्देश्य से चुने गए हैं। इन चेहरों के नाम हैं – जीवेश कुमार मिश्रा, संजय सरावगी, कृष्ण कुमार उर्फ मंटू पटेल, राजू सिंह, मोतीलाल प्रसाद, विजय मंडल और सुनील कुमार कुशवाहा। इन नेताओं के माध्यम से BJP विभिन्न जातिगत समूहों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। अब, आइए जानते हैं ये चेहरे कौन हैं और उनके जरिए किस जातिगत समीकरण को साधने की कोशिश की जा रही है।
1. जीवेश कुमार मिश्रा
जीवेश कुमार मिश्रा BJP के एक प्रमुख नेता और पूर्व मंत्री हैं। वे भूमिहार समुदाय से आते हैं और जाले विधानसभा क्षेत्र में उनका अच्छा प्रभाव है। उनकी नियुक्ति से BJP को भूमिहार वोट बैंक को मजबूत करने में मदद मिल सकती है, जो बिहार में एक महत्वपूर्ण सवर्ण जाति है। 2. संजय सरावगी
संजय सरावगी दरभंगा से विधायक हैं और एक सफल व्यापारी के रूप में जाने जाते हैं। वे मारवाड़ी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो शहरी क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों में प्रभावशाली है। इनकी नियुक्ति से BJP को वैश्य समुदाय का समर्थन मिल सकता है, खासकर मिथिला क्षेत्र में।
3. कृष्ण कुमार उर्फ मंटू पटेल
मंटू कुमार, जो कुर्मी समुदाय से आते हैं, BJP से जुड़े अमनौर विधानसभा के विधायक हैं। कुर्मी समुदाय बिहार में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में आता है, और इस समुदाय के साथ BJP का संबंध भी मजबूत हो सकता है।
4. राजू सिंह
राजू सिंह साहेबगंज से BJP विधायक हैं और राजपूत समुदाय से आते हैं। उनका प्रभाव मुजफ्फरपुर और उत्तरी बिहार में है, जहां राजपूत वोटरों को BJP के पक्ष में लाने की कोशिश की जा रही है।
5. मोतीलाल प्रसाद
मोतीलाल प्रसाद रीगा विधानसभा से BJP के विधायक हैं और अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) से ताल्लुक रखते हैं। इनकी नियुक्ति से BJP को बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में इस वर्ग का समर्थन मिल सकता है, जहां तेली जाति का अच्छा खासा प्रभाव है।
6. विजय मंडल
विजय मंडल सिकटी विधानसभा से विधायक हैं और केवट (मल्लाह) समुदाय से आते हैं। इस समुदाय का बिहार के सीमांचल क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है, और उनकी नियुक्ति से BJP को इस क्षेत्र में मजबूती मिल सकती है।
7. सुनील कुमार
सुनील कुमार बिहारशरीफ से BJP के विधायक हैं और कुशवाहा/कोईरी जाति से आते हैं। यह समुदाय भी ईबीसी का हिस्सा है और इनके जरिए BJP को इस वर्ग का समर्थन मिल सकता है।
इस विस्तार के माध्यम से एनडीए जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है। खासकर उन समुदायों को जो अब तक विपक्ष के साथ थे। हालांकि, इस विस्तार में एक भी विधायक जदयू से नहीं है और ना ही एक महिला विधायक को स्थान मिला है, जो खुद में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार भाजपा के विधायकों को किन शर्तों पर प्रोन्नति दे रहे हैं और क्या वे बिहार की राजनीति में बने रहेंगे या फिर केंद्रीय राजनीति की ओर रुख करेंगे।