पटना:
बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक फर्जी चीफ जस्टिस को गिरफ्तार (Fake Chief Justice arrested) किया है। आरोपी की पहचान अभिषेक भूपालका (Abhishek Bhupalka) के रूप में हुई है। ये कोई और नहीं बल्कि बिहार कैडर के IPS आदित्य कुमार (IPS Aditya Kumar) के दोस्त हैं। दरअसल IPS ने अपने ऊपर शराबबंदी से जुड़े केस को खत्म कराने के लिए अपने दोस्त को हाईकोर्ट का फर्जी चीफ जस्टिस बना दिया। इस फर्जी चीफ जस्टिस ने DGP एसके सिंघल (DGP SK Singhal) को फोन कर केस खत्म करने के लिए कहा। वह भी एक नहीं 40 से 50 बार। केस खत्म होने के बाद खुफिया इनपुट से मामले का खुलासा (Disclosure of the case with intelligence input) हुआ।

केस खत्म कराने तक ही नहीं प्लान
प्राप्त जानकारी के अनुसार IPS अधिकारी आदित्य कुमार की योजना अपना केस खत्म कराने तक ही नहीं थी। वह अन्य जिले में एसएसपी के पद पर पोस्टिंग भी चाह रहे थे। इओयू की पूछताछ में अभिषेक ने बताया कि आइपीएस अधिकारी उससे उसके अजय निलयन अपार्टमेंट, नागेश्वर कॉलोनी कई बार मिले हैं। वे पुलिस मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय और वरिस्ता रेस्टोरेंट, बोरिंग रोड में मुलाकात करते थे। अभिषेक का टाइल्स की एक्जिविशन रोड में बड़ी दुकान है।
आईपीएस आदित्य कुमार फरार
इस खुलासे के बाद बिहार पुलिस की EOW ने आरोपी अभिषेक भूपालका उर्फ अभिषेक अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अभिषेक की निशानदेही और पहचान के आधार पर मामले में अन्य आरोपी गौरव राज, शुभम कुमार और राहुल रंजन जायसवाल को भी गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इनके ठिकाने से वह मोबाइल फोन और सिमकार्ड भी बरामद कर लिया है, जिससे डीजीपी को फोन किया गया था। फिलहाल मुख्य आरोपी और बिहार कैडर के आईपीएस आदित्य कुमार फरार है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लुकआउट नोटिस जारी कराने की तैयारी में है। यह मामला 13 अक्टूबर को ही EOW में भेजा गया था।

बनाई फूल प्रूफ योजना
आईपीएस आदित्य ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को खत्म कराने के लिए फूल प्रूफ योजना तैयार की थी। इसके बाद उसने सितंबर महीने में अपने दोस्त अभिषेक अग्रवाल को प्लान समझाया और उसे चीफ जस्टिस बनकर डीजीपी को फोन करने के लिए कहा। इसके लिए पूरी स्क्रिप्ट भी खुद आदित्य ने लिखकर अभिषेक को दी थी। पुलिस की पूछताछ में अभिषेक ने बताया कि आदित्य ने डीजीपी को फोन करने के लिए पटना सिटी में मोबाइल सिम बेचने वाले गौरव राज के स्टाफ राहुल कुमार के नाम से सिम कार्ड लिया था। यह सिमकार्ड उसके पास बोरिंग रोड में मिस्टर गैजेट नाम की दुकान के मालिक राहुल रंजन जायसवाल के जरिए पहुंचाया गया। राहुल रंजन और अभिषेक दोनों कथित तौर पर दोस्त बताए जा रहे हैं। सिम मिलने के बाद इन्होंने एक नया मोबाइल फोन खरीदा और फिर डीजीपी को फोन किया।

पूरे रौब के साथ डीजीपी से करता रहा बात
अभिषेक ने बताया कि डीजीपी को शक न हो इसके लिए वह चीफ जस्टिस बनकर पूरे रौब के साथ बात करता था। डीपी में मुख्य न्यायाधीश का फोटो भी लगा था। शुरू में तो डीजीपी भी उसे असली चीफ जस्टिस मान बैठे। अभिषेक ने इओयू को बताया कि वह जब नाराजगी दिखाता था तो डीजीपी मोबाइल पर वाट्सएप के माध्यम से समय लेकर कॉल भी करते थे। कॉल राहुल रंजन जायसवाल द्वारा उपलब्ध कराये फोन से किया गया था।