द फॉलोअप डेस्क
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 से अपनी आठ दिवसीय “समृद्धि यात्रा” की शुरुआत की, जो पूरे राज्य के 9 जिलों में फैली है। यह पहला ऐसा राज्यव्यापी दौरा है जो विधानसभा चुनाव के बाद किया जा रहा है। यात्रा का लक्ष्य पिछले ‘प्रगति यात्रा’ व ‘सात निश्चय’ कार्यक्रमों के तहत घोषित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना, तैयार योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास करना तथा जन-सम्पर्क के जरिए जनता की समस्याएँ सुनना है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 तक चले प्रगति यात्रा में करीब ₹50,000 करोड़ की योजनाएँ घोषित की गई थीं।
और अब समृद्धि यात्रा के पहले चरण की शुरुआत पश्चिमी चंपारण के बेतिया से हुई। पहले दिन मुख्यमंत्री ने कुमारबाग औद्योगिक क्षेत्र में कई परियोजनाओं का जायजा लिया और कुल ₹153 करोड़ लागत वाली 125 परियोजनाओं की आधारशिला रखी, साथ ही ₹29 करोड़ की लागत से तैयार 36 परियोजनाओं का उद्घाटन किया।.jpeg)
बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अब कोई भी सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा। इस अवसर पर बायोगैस संयंत्र, महिला श्रमिक छात्रावास (₹19 करोड़) सहित कई विकास योजनाओं की आधारशिला रखी गई और कृषि मेला का उद्घाटन किया गया।
सोमवार 19 जनवरी को सीएम समृद्धि यात्रा के दौरान सीतामढ़ी और शेख़पुरा में थे। उन्होंने सिवान–मिनापुर मार्ग पर बिलासिंदु में ₹70.89 करोड़ की लागत के चौकोर पुल का उद्घाटन किया और जिले में कुल ₹613 करोड़ के विकास कार्यों की शुरुआत की। सीतामढ़ी में ₹346 करोड़ की 41 योजनाओं की आधारशिला रखी गई और ₹208.12 करोड़ की 26 परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ। शेख़पुरा में ₹17 करोड़ की 25 योजनाओं की आधारशिला और ₹42 करोड़ की 75 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। इन आयोजनों में मुख्यमंत्री ने भविष्य की योजनाओं, जैसे उद्योग स्थापना, दुग्ध उत्पादन समितियों की स्थापना और आदर्श विद्यालयों के विस्तार का ऐलान भी किया।.jpg)
मंगलवार 20 जनवरी को गोपालगंज जिले में सीएम ने ₹316 करोड़ के विकास कार्य शुरू किए। ₹181 करोड़ की 33 नई योजनाओं की आधारशिला रखी गई और ₹135 करोड़ की 7 तैयार परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में कृषि मेला का भी उद्घाटन हुआ और उन्होंने पटना सहित आर्थिक विकास की दिशा में नौ बिंदुओं की रूपरेखा बताई।
बुधवार 21 जनवरी को सीएम ने सारण जिले में ₹538 करोड़ की 69 योजनाओँ का शिलन्यास या उद्घाटन किया। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इसमें ₹451 करोड़ की 45 योजनाओं की आधारशिला रखी गई और (₹87 करोड़ की 24 योजनाओं का उद्घाटन किया गया। इसमें आईटीआई छपरा इमारत, ‘दीदी का सिलाई घर’ जैसे कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण केंद्र भी शामिल हैं।
गुरुवार 22 जनवरी को राजेंद्र स्टेडियम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने जिले के लिए कुल ₹202 करोड़ की लागत के 71 परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास किया। इनमें ₹157 करोड़ की 40 नई योजनाओं की आधारशिला और₹45 करोड़ की 31 पूरी हुई योजनाओं का उद्घाटन शामिल था। यह समृद्धि यात्रा के तहत सिवान में सबसे बड़ी विकास पहल रही।
इधर, समृद्धि यात्रा के दौरान विपक्षी दलों ने भी तीखे तेवर दिखाए हैं। आरजेडी के प्रवक्ता इजाज अहमद ने सवाल उठाया कि यह यात्रा भाजपा के दबाव को कम करने के लिए हो रही है और इसे बेतिया के बजाय औरंगाबाद (जहाँ हाल ही में एक पुल ढहा था) से शुरू होना चाहिए था। उन्होंने व्यंग्य में कहा, “नीतीश कुमार ने अलग-अलग नामों से यात्राएं की हैं; इस बार ‘समृद्धि’ है, लेकिन क्या समृद्धि का मंतव्य बताएं?”। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ जद (यू) ने इसे विकास और जनता से संवाद का माध्यम बताया। यात्रा के मद्देनजर निर्वाचन आयोग, जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया है।.jpeg)
लगे हाथ अगले चरण की तैयारियाँ भी जोरों पर हैं। समृद्धि यात्रा 24 जनवरी को वैशाली जिले में संपन्न होनी है। 22 जनवरी की शाम तक सारण का दौरा पूरा कर चुके मुख्यमंत्री अगले दिन मुजफ्फरपुर और उसके बाद वैशाली की जनता से रूबरू होंगे। इन आयोजनों में भी नए विकास प्रोजेक्ट्स की घोषणा और जनता के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने पहले ही संकेत दिए हैं कि समृद्धि यात्रा के दूसरे चरण में भी राज्य के मूलभूत ढांचों, जैसे सड़क, पुल और स्वास्थ्य-साक्षरता केंद्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।