द फॉलोअप डेस्कः
केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने अपने सभी पांचों सांसदों को उनकी ही सीट पर उतारने की घोषणा करके एनडीए में भी खलबली मचा दी है। ऐसा तब है जबकि चिराग पासवान की भी दावेदारी इन पांचों सीटों पर है। दोनों ही लोजपा की सारी सीटों पर अपना दावा कर रहे हैं। पशुपति कुमार पारस समस्तीपुर से वर्तमान सांसद और अपने छोटे भाई रामचन्द्र पासवान के पुत्र प्रिंसराज को फिर से मैदान में उतारना चाहते हैं तो वहीं चिराग पासवान किसी भी हालत में प्रिंसराज को यहां से चुनाव लड़ते नहीं देखना चाहते हैं। वे यहां से अपने खास उम्मीदवार को चुनाव लड़वाना चाहते हैं। चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस आमने-सामने हैं। रामविलास पासवान के उत्तराधिकार के सवाल पर चाचा-भतीजा दोनों ही खुद को उनका राजनीतिक वारिस बताने साबित करने जुटे हैं। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ जा रहा है। यह और भी गहराता जा रहा है। खासकर हाजीपुर लोकसभा सीट को लेकर तो दोनों के बीच जबरदस्त टक्कर है। समस्तीपुर सीट को लेकर भी दोनों के बीच तलवारें खींचीं हैं।

दोनों का ही हाजीपुर सीट पर दावा
पशुपति कुमार पारस ने रविवार को यह साफ कर दिया है कि वह अपने भतीजे चिराग पासवान के लिए हाजीपुर लोकसभा सीट नहीं छोड़ेंगे। जबकि हाजीपुर से चिराग पासवान चुनाव लड़ना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह सीट उनके पिता की है और वे उनके न केवल वारिस हैं। उनके पिता ने खुद उन्हें पूरी पार्टी की बागडोर सौंपी थी। पिता के साये में ही उन्होंने पार्टी को सशक्त बनाने और संगठन विस्तार की योजना पर काम किया। लिहाजा, अब वे उनकी सीट से खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं ताकि पिता के सपनों को पूरा कर सकें। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि अबतक इसपर चुप्पी साधे भाजपा, हाजीपुर की सीट से दोनों में से किसे उतारती है।

यह एक बदलाव होगा
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) प्रमुख दिवंगत रामविलास पासवान लंबे समय तक इस लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे थे जिसपर चिराग पासवान दावा कर रहे हैं। रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी पार्टी गुट में बंट गई जिसमें से एक गुट के नेता पारस और दूसरे गुट के नेता चिराग हैं। पारस ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ,''हम हर साल 28 नवंबर को लोजपा का स्थापना दिवस मनाते हैं। हम इस साल भी ऐसा करेंगे, लेकिन लेकिन समारोह पटना की जगह हाजीपुर में आयोजित किया जाएगा जो स्वर्गीय राम विलास पासवान की कर्मभूमि रही है।'' यह पूछे जाने पर कि क्या स्थल में बदलाव उनके दिवंगत भाई के गढ़ में ताकत के परीक्षण के लिए है। इसपर पारस ने जवाब दिया,''यह एक बदलाव होगा। यह हर साल एक ही प्रकार के भोजन की एकसरता को दूर करने के लिए एक अलग व्यंजन आजमाने जैसा है। ''

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