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200 रूपये के घूस कांड में 40 साल चला मुकदमा, रिटायरमेंट के बाद दोषमुक्त हुए 2 पुलिसकर्मी

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पटना/बिहार
पटना सिविल कोर्ट ने 1986 में 200 रुपये रिश्वत लेने के मामले में दो पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त कर दिया। करीब 40 साल बाद मंगलवार को उनकी रिटायरमेंट के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। रिश्वतखोरी मामले में 40 साल तक दोनों पर मुकदमा चला। निगरानी की विशेष अदालत ने साक्ष्य के अभाव में मंगलवार को दोनों को दोषमुक्त करने का फैसला लिया। यह मामला गर्दनीबाग थाना की है।

गाली-गलौज, मारपीट और घूस मांगने का था आरोप
आरोपी सेवानिवृत्त जमादार (ASI) बच्चा सिंह जिनकी उम्र 82 वर्ष है और योगेन्द्र राम जिनकी उम्र 73 वर्ष बतायी जा रही है, इन दोनों पुलिसकर्मियों को रिश्वतखोरी मामले में चालिस साल बाद दोषमुक्त किया गया है। दरअसल वर्ष 1986 में शिक्षा विभाग के चतुर्थवर्गीय कर्मचारी श्याम नारायण राम की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ था। आरोप था कि 7 मार्च को गर्दनीबाग थाना के तत्कालीन जमादार बच्चा सिंह, योगेंद्र राम और तीन अज्ञात लोगों ने झोपड़ी की मरम्मत कर रहे श्याम नारायण राम के साथ गाली-गलौज की, उन्हें बेंत से पीटा और रिश्वत की मांग की। मामले में श्याम नारायण राम ने पुलिस अधिक्षक से इसकी शिकायत की और कहा कि उनसे पांच सौ रुपये रिश्वत भी मांग की गई है। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक के आदेश पर दोनों को एक प्लान के तहत दो सौ रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया था।  

साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त
इसी मामले में दोनों आरोपियों को 7 मार्च 1986 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन 3 अप्रैल को वे जमानत पर रिहा हो गए। इसके बाद गर्दनीबाग थाना में कांड संख्या 171/1986 दर्ज हुआ, जिसकी जांच करीब 38 वर्षों तक चली। वर्ष 2024 में पुलिस ने निगरानी की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की और 2026 में अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत संज्ञान लेते हुए 16 जून को दोनों आरोपियों पर आरोप तय किए। इसके बाद अभियोजन को साक्ष्य और गवाह पेश करने का निर्देश दिया गया, जिसके बाद विशेष लोक अभियोजक कृष्ण मुरारी प्रसाद ने तीन अभियोजन गवाह अदालत में पेश किए। लेकिन मामले में साक्ष्य के अभाव में दोनों को दोषमुक्त किया गया।

Tags - Patna Civil Court Patna bribery case Bihar corruption case