दिल्ली:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक याचिका दायर की गई थी। जिसमें उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग (Demand for removal from Chief Minister under anti-defection law) की गई थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की गई। जिसमें याचिका को खारिज कर दिया है। पीठ में इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि दलबदल विरोधी कानून और यहां तक की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत कुछ शर्तों के अधीन चुनाव के बाद के गठबंधन की अनुमति है। इसलिए यह रिट याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है। बता दें कि इस याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति एमआर शाह और एमएम सुंदरेश ने की है।

बिहार में मतदाताओं के साथ की गई है धोखाधड़ी
दायर याचिका में मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। मुजफ्फरपुर के एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि नीतीश कुमार की पार्टी ने अगस्त 2022 में एक नया गठबंधन बनाया है,जो चुनाव के बाद बनाया गया था और यह दलबदल विरोधी कानून के तहत आता है। नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू द्वारा आरजेडी के साथ महागठबंधन बनाकर बिहार में मतदाताओं के साथ धोखाधड़ी की गई है। याचिका में सांसद को एक उचित कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। ताकि चुनाव पूर्व दलबदल सत्ता लोभी नेताओं की नीति ना बन जाए। जो अपने व्यक्तिगत लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी पार्टी को राजनीतिक विचारधारा के दरकिनार कर देते है।

9 अगस्त 2022 को नीतीश कुमार ने छोड़ा था NDA का दामन
9 अगस्त 2022 को नीतीश कुमार ने NDA का साथ छोड़कर आरजेडी के साथ महागठबंधन बनाया था। इसके बाद से ही बिहार सियासत चरम पर है। इसके बाद नीतीश कुमार ने 10 अगस्त को फिर से सीएम पद की शपथ ली थी इसमें उनके साथ उपमुख्यमंत्री की शपथ तेजस्वी यादव ने ली थी। बता दें कि नीतीश कुमार सत्ता बदलने में माहिर है उन्होंने साल 2017 में आरजेडी से नाता तोड़ने के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। इससे पहले भी साल 1994 में नीतीश कुमार ने अपने सहयोगी लालू प्रसाद यादव का साथ छोड़कर सबको हैरान कर दिया था। उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी का गठन किया था। बीजेपी और समता पार्टी के बीच 17 साल तक दोस्ती चली। 2003 में समता पार्टी बदलकर जेडीयू बन गई थी।