द फॉलोअप डेस्क:
Boat Accident: बिहार (Bihar) के वैशाली जिले के राघोपुर में नाव हादसे (Vaishali boat accident) में 13 बच्चों की मौत हो गई, जबकि नौ बच्चे अब भी लापता बताए जा रहे हैं। तीन बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया। हादसा उस समय हुआ, जब रामपुर श्यामचंद पंचायत (Rampur Shyamchand Panchayat) के एक ही टोले के करीब 25 बच्चे पड़ोसी गांव में श्राद्ध का भोज खाने जा रहे थे। दोनों गांवों के बीच करीब 300 मीटर चौड़ा जलभराव वाला क्षेत्र है, जिसे पार करने के लिए बच्चे नाव पर सवार हुए थे। बताया जा रहा है कि नाव पहले सरकारी थी, लेकिन पुरानी होने के कारण उसे परित्यक्त घोषित कर दिया गया था। बाद में ग्रामीणों ने उसकी मरम्मत कर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। नाव में दरार होने की बात भी सामने आई है।

खाट पर बच्चों को लेकर अस्पताल भागे ग्रामीण
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नाव किनारे से कुछ दूर आगे बढ़ी तो डगमगाने लगी। बीच पानी में पहुंचते-पहुंचते उसमें पानी भरने लगा और देखते ही देखते नाव पलट गई। बच्चे पानी में डूबने लगे, जिसके बाद आसपास के ग्रामीण बचाव के लिए दौड़े। रात के अंधेरे में लोगों ने काफी मशक्कत कर बच्चों को पानी से बाहर निकाला। ग्रामीणों के अनुसार, एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचने के कारण कुछ बच्चों को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा। हादसे में एक ही परिवार की सात बच्चियों की मौत होने की बात भी सामने आई है। इस घटना से पूरे इलाके में मातम पसरा है।

चार लाख के मुआवजे का ऐलान
हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। वहीं, इस दुर्घटना ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित आवागमन और आपातकालीन सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस नाव को पहले ही परित्यक्त घोषित किया गया था, उसका इस्तेमाल दोबारा कैसे शुरू हुआ? क्या नाव की सुरक्षा जांच की गई थी? और जब गांवों के बीच आने-जाने का रास्ता नाव ही हो, तो सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का जवाब हादसे की जांच में सामने आना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।