द फॉलोअप डेस्क
बिहार और देश भर में मतदाता पुनरीक्षण (SIR) पर छिड़े संग्राम के बीच देश के नेता प्रतिपक्ष 'राहुल गांधी' बिहार आ रहे हैं। वैसे तो उनका कार्यक्रम 9-10 अगस्त से ही तय था लेकिन अब वे अपने दौरे की शुरुआत 17 अगस्त को करेंगे। दौरे की शुरुआत के लिए कांग्रेस ने बिहार के शाहाबाद क्षेत्र के अंतर्गत सासाराम जिले में अवस्थित ताराचंडी धाम को चुना है, जो कि मान्यताओं के अनुसार एक शक्तिपीठ है। कांग्रेसजनों ने इस यात्रा को 'मतदाता अधिकार यात्रा' नाम दिया है यानी कि नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष के नेताओं का जोर बिहार में जारी SIR पर सबसे अधिक होगा। .jpeg)
गौरतलब है कि यह नेता प्रतिपक्ष का हालिया दौरा इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि देश के गृह मंत्री अमित शाह इसी सप्ताह बिहार आए थे, और वे जिस इलाके में आए थे उसे बिहार के भीतर मैथिल प्रभाव वाला इलाका कहते हैं। वो इलाका जो नेपाल से भी सीमा साझा करता है और जिस इलाके को पौराणिक और ऐतिहासिक तौर पर सीता की जन्मस्थली के तौर पर जानते हैं। मतलब कि मधुबनी जिले का पुनौरा धाम। उसी पुनौरा धाम में सीता मंदिर का शिलान्यास करने गृह मंत्री पहुंचे थे। साथ में थे मुख्यमंत्री और भाजपा व जदयू के तमाम बड़े नेता। .jpg)
भाजपा की राजनीति और वोट नीति के लिहाज़ से समझिए कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब भाजपा नेतृत्व ने एक और प्रोजेक्ट में हाथ लगा दिया है। तो वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी बिहार के शाहाबाद के इलाके से विधिवत अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे। .jpeg)
गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे के बाद, अब देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर बिहार आ रहे हैं। वो रोहतास जिले के सासाराम से अपनी यात्रा की शुरुआत 17 अगस्त को करेंगे और औरंगाबाद होते हुए कई जिलों में जाएंगे। यात्रा का नाम 'मतदाता अधिकार यात्रा' दिया गया है। बिहार में मतदाता पुनरीक्षण के बाद विपक्ष लगातार चुनाव आयोग के साथ-साथ सरकार पर भी वोट चोरी करने का आरोप लगा रहा है।
राहुल गांधी की ये यात्रा ताराचंडी मंदिर से पूजा अर्चना करने के बाद शुरू होगी। बता दें कि 8 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में मंदिर का शिलान्यास किया, जिसे अयोध्या के बाद बीजेपी का दूसरा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यानी कमंडल की सियासत जिसकी नींव 1990 के दशक में पड़ी थी, उसके आसरे मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कमोबेश हर तरफ से की जा रही है। साथ ही शक्तिपीठ के जरिए राजनीतिक पार्टियों का शुरू हुआ शक्ति प्रदर्शन बिहार और देश की सियासत में नई इबारत गढ़ रहा है। .jpeg)
बिहार की राजनीति में चाहें मिथिला (दरभंगा, मधुबनी, सहर, मधेपुरा, सुपौल,शिवहर, वैशाली) का क्षेत्र हो या शाहाबाद ( भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर) मगध (गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल ) का ये चुनावी लिहाज से काफी अहम हो जाते हैं, शायद यही वजह है कि प्रधानमंत्री हों या गृह मंत्री या फिर विपक्ष के कद्दावर नेता सब इन क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की इस यात्रा में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई और बड़े और दिग्गज नेता शामिल हो सकते हैं। साथ ही खबरें ये भी हैं कि प्रियंका गांधी भी इस यात्रा में शामिल होंगी।
तो आइये इन क्षेत्रों के सियासी गुणा- गणित को भी समझ लेते हैं। बात शाहाबाद और मगध क्षेत्र की करें तो यहां कुल विधानसभा की 62 सीटें हैं, जिन पर सबकी नजर टिकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो इन 62 सीटों पर महागठबंधन का दबदबा रहा। इतना ही नहीं ये दबदबा पिछले साल लोकसभा के चुनाव में भी नजर आया। याद कर लीजिए कैसे शाहाबाद की सभी सीटों पर महागठबंधन के नेताओं ने अपना परचम लहराया, और एक भी सीट NDA के हिस्से नहीं आई। वहीं बात अगर मिथिलांचल की करें तो इस क्षेत्र में 60 विधानसभा सीटें हैं, 2020 के विधानसभा चुनाव में 40 से ज्यादा सीट पर एनडीए के पाले में आई थी। सीतामढ़ी की पांच में से तीन विधानसभा सीटों पर बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को जीत मिली वहीं, राजद दो सीटें जीतने में कामयाब रही थी । इसी तरह, शिवहर की एकमात्र विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय जनता दल ने जीत हासिल की थी। मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, उजियारपुर और सीतामढ़ी में एनडीए के प्रत्याशी को जीत हासिल की थी।