द फॉलोअप डेस्क, रांची:
सेनापति और सेना के रहते यदि राजा को अकेले जंग में उतरना पड़े तो क्या कहेंगे! बहादुरी। बात नजरिये की नहीं है, थोड़ा व्यवहारिक होकर सोचिए। राजा का रणक्षेत्र में सीधे उतरना आदर्श स्थिति है कि अराजकता। ढंग से सोचेंगे तो पाएंगे कि परिस्थितियां प्रतिकूल है। इसे ऐसे न समझाया जाए कि राजा कितना जिम्मेदार है, बल्कि इसे ऐसे माना जाये कि सेनापति और सेना कितनी अकर्मण्य है। जो काम सेनापति, सेना और सलाहकारों का है, उसके लिए राजा स्वंय आगे आया हो तो मतलब साफ है कि काम ठीक नहीं हुआ। इतनी भूमिका क्यों बांधी है, इसको समझने से पहले जरा ये तस्वीर देखिए।

मंत्री के बाद पहुंचे छतरपुर थाना प्रभारी सौरभ चौबे
पायजामा-टीशर्ट पहने कभी कुर्सी पर विराजमान तो कभी गाड़ियां खंगालते, ये हैं झारखंड के वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर। जगह है पलामू जिले के छतरपुर थानाक्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-98 पर करमाकला पेट्रोल पंप। राधाकृष्ण किशोर यहां अवैध कोयला लदे वाहनों की जांच करते नजर आ रहे हैं, लेकिन ये तो स्थानीय पुलिस का काम है। कैबिनेट मंत्री कब से आधी रात गाड़ियां जांचने लगे। हालांकि, सच यही है कि वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर खुद सड़क पर उतरकर अवैध कोयला परिवहन के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। तो क्या पुलिस नहीं आई। पुलिस आई न। जब छतरपुर थाना प्रभारी सौरभ चौबे को इत्तिला दी गई कि माई-बाप खुद ही गाड़ियों की जांच करने आए हैं तो फौरन दलबल के साथ मौके पर पहुंच गये। इतने सक्रिय तो हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा पर कौन सवाल उठा सकता है भला।
जिला खनन और परिवहन पदाधिकारी पर उठा सवाल
कोयले का अवैध खनन और परिवहन यूं तो अपराध है। इसे रोकना जिला खनन पदाधिकारी और जिला परिवहन पदाधिकारी का काम है। जिला पुलिस बल इसमें अधिकारियों की सहायता करता है। कोयले का अवैध खनन और परिवहन रोकना इसलिए जरूरी है ताकि सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं हो। बता रहे हैं कि मंत्री राधाकृष्ण किशोर को गुप्त सूचना मिली थी कि छतरपुर के रास्ते बिहार तक कोयला अवैध ढंग से ढोया जाता है। वित्त मंत्री होने के नाते राजस्व का नुकसान बचाने के लिए राधाकृष्ण किशोर सड़क पर उतर आए। उनके प्रयासों को पूरे 100 नंबर हैं।
सवाल है कि दफ्तर, सरकारी आवास, विधानसभा और जनता दरबार में व्यस्त रहने वाले वित्त मंत्री को पता है कि अवैध कोयला खनन और परिवहन कहां और कैसे होता है तो दिन-रात पेट्रोलिंग पर जुटी पुलिस के सूचना तंत्र को लकवा कैसे मार गया। कहां गया झारखंड पुलिस का खुफिया तंत्र।
.jpeg)
रात 11 बजे से 1 बजे तक होती रही गाड़ियों की चेकिंग
मंत्री राधाकृष्ण किशोर रात को 11 बजे से 1 बजे तक गाड़ियां चेक करते रहे। 3 गाड़ियां पकड़ी भी जिन्हें छतरपुर थाना को सौंप दिया। थाना प्रभारी सौरभ चौबे उन्हें जब्त करके थाने ले आए। पुलिस, मंत्रीजी के सहयोग से अवैध कोयला परिवहन में लगी गाड़ियां पकड़ने पर अपनी पीठ थपथपा सकती है, लेकिन जानकार जानते हैं कि पुलिस महकमे के लिए यह कितनी शर्मनाक बात है। राधाकृष्ण किशोर एक प्रेस वार्ता करके पुलिस, जिला खनन और परिवहन विभाग की कार्यशैली की आलोचना करते, उन्होंने खुद उतरकर गाड़ियां चेक कर डाली। एक ही बात है। बल्कि गाड़ियां चेक करना तो महकमे के मुंह पर करारा तमाचा है।
उन्होंने जिला खनन पदाधिकारी और जिला परिवहन पदाधिकारी की कार्यशैली की गंभीर आलोचना की है।
जो बात मंत्री राधाकृष्ण किशोर को पता है, उसी बात की जानकारी जिले के वरीय अधिकारियों को क्यों नहीं है। या जानकारी है, लेकिन एक्शन लेना जरूरी नहीं समझा। अवैध परिवहन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। ये चंद गंभीर सवाल हैं, जो मंत्री राधाकृष्ण किशोर को अफसरों से जरूर करना चाहिए। राजस्व बचाने अकेले मंत्रीजी कहां-कहां तक जाएंगे। ये कोई एक थानाक्षेत्र का मामला है क्या...
वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर की थाना प्रभारी को हिदायत
सघन चेकिंग अभियान के बाद 3 गाड़ियां जब्त करते हुए मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने जाते-जाते थाना प्रभारी सौरभ चौबे से कहा कि अब नियमित रूप से अवैध कोयला ढुलाई करने वाले वाहनों की जांच होनी चाहिए। क्या लगता है, पुलिस वित्त मंत्री के निर्देशों का क्या करेगी। क्या मंत्री राधाकृष्ण किशोर का रोजाना यूं सड़क पर उतरकर वाहनों की जांच करना संभव है। यदि नहीं तो फिर उपाय क्या है।
जानकार बताते हैं कि वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने आधी रात अवैध कोयला ढुलाई करने वाले वाहनों की जांच करके उसी व्यवस्था की पोल खोल दी है, जिसका वह हिस्सा हैं। उन्होंने लालफीताशाही की तस्दीक की है। उनका एक एक्शन अनेक सवाल छोड़ गया है कि जिला खनन पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और उनका महकमा कोयले अथवा इस प्रकार के अन्य अवैध कारोबार के खिलाफ क्यों एक्शन नहीं लेता।
वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर का एक्शन और कई सवाल
सोमवार रात को एक्शन में वाणिज्य कर संयुक्त आयुक्त मनोज कुमार, राज्य कर पदाधिकारी कीर्तिवर्धन सिंह औरर छतरपुर थाना प्रभारी सौरभ चौबे समेत पुलिस बल मौजूद था। थाना प्रभारी, मंत्री महोदय के बाद पहुंचे थे और बाकी अधिकारी वित्तमंत्री की टीम में थे।
जाते-जाते वही अनकहा सवाल छोड़ जाता हूं कि जब मंत्री राधाकृष्ण किशोर को अवैध परिवहन की जानकारी है तो अधिकारियों को क्यों नहीं....