द फॉलोअप डेस्क:
Bihar News: बिहार में कानून का राज है कि नहीं। पुलिस महकमे (Bihar Polic) का इकबाल है कि खत्म हो गया। महिलाओं की सुरक्षा (Women Safety in Bihar) सुनिश्चित करने को क्या बिहार में कोई सरकार है। प्रदेश की आधी आबादी किसकी ओर देखे। जमुई, समस्तीपुर, बांका, दरभंगा, पटना और अब बेगुसराय (Begusarai Girl Sexual Assault)। जिले बदलते हैं। तारीख बदल जाता है, लेकिन महिलाओं के लिए कुछ नहीं बदलता। उनके साथ आपराधिक वारदातों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। बिहार में समस्या केवल इतनी भर नहीं है कि अपराध हो रहा है। विडंबना ये है कि अपराधी, अपनी करतूतों का वीडियो खुद बनाकर सोशल मीडिया पर डालते हैं और प्रदेश में विधि-व्यवस्था को चुनौती देते हैं।
बावजूद इसके कि प्रदेश के मुखिया ने सलाह दी थी कि अपराध करो, लेकिन वीडियो मत बनाओ। रील नहीं बनाओगे तो पकड़े नहीं जाओगे। हालांकि, यहां ऐसा लगता है कि अपराधी कह रहे हों कि ऐसे, कैसे! अपराध किया और बताया नहीं तो किस बात के अपराधी।

युवती के साथ यौन उत्पीड़न और मारपीट का वीडियो बनाया
बेगुसराय में जो हुआ, वो वारदात अब कार्रवाई, सजा और सुनवाई से आगे की बात हो गई है। वीडियो देखेंगे तो घिन आ जायेगी कि क्या हम वाकई 21वीं सदी में जी रहे हैं। एक युवती को सरेआम उठा लिया जाता है। होटल ले जाकर उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती है। उसका बलात्कार होता है और फिर नग्न हालत में वीडियो बनाकर ना केवल पीड़िता के परिचितों को भेजा जाता है, बल्कि उसे सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया जाता है। हिम्मत, जुर्रत और दुस्साहस देखिए कि अपराधी अपना चेहरा भी नहीं छिपा रहा है। हैरानी होती है यह देखकर कि युवती के साथ मारपीट और उसका यौन उत्पीड़न करने वाला दरिंदा, यह सब रिकॉर्ड करते हुए गोर्वोक्ति का भाव रखता है। सच यही है कि उस व्यक्ति ने पुलिस को खुली चुनौती दी। उसकी करतूतों में एक अनकहा संदेश है कि देखो, मुझे ठीक लिया वो किया। तुम मेरा कुछ बिगाड़ नहीं पाओगे। बेगुसराय की घटना में चिंता की बात यह भी है कि युवती के साथ मारपीट और रेप का वीडियो बनाने वाला युवक कोई हिस्ट्रीशीटर नहीं है। बावजूद इसके उसके मन में कानून का खौफ नहीं है। पुलिस का डर नहीं है। कार्रवाई की चिंता नहीं है। विधि-व्यवस्था ध्वस्त हो जाना शायद इसी को कहते हैं।
बेगुसराय की घटना पर क्यों बिहार को सोचना चाहिए!
बेगुसराय की घटना से पूरे बिहार को चिंतित होना चाहिए। समाज को मंथन करना चाहिए कि जो हुआ वो क्यों हुआ। लोगों में खुद ही सजा देने की प्रवृत्ति क्यों पैदा होने लगी है। बेगुसराय की घटना एक जघन्य अपराध है। युवती का केवल शारीरिक उत्पीड़न ही नहीं हुआ बल्कि उसका मानमर्दन भी किया गया। वो बिचारी चीखती-चिल्लाती रही। खुद को छोड़ देने की गुहार लगाती रही, लेकिन सामने जो था, उसे राक्षस की संज्ञा देना गलत नहीं होगा। वो युवती को पीटता रहा। घसीटता रहा। युवती से यौन उत्पीड़न का वीडियो बनाया गया। यदि पुलिस महकमे का जमीर जिंदा है तो इस अपराध को अपने लिए चुनौती समझना चाहिए।
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पुलिस ने मुख्य आरोपी रोहित कुमार सहनी को पकड़ा
पुलिस ने पीड़िता के साथ मारपीट और यौन उत्पीड़न के मुख्य आरोपी रोहित कुमार साहनी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के दौरान भागने के क्रम में उसके घुटने में चोट भी लगी। इस मामले में पुलिस ने पहले ही रोहित कुमार साहनी के जीजा विक्रम सहनी को गिरफ्तार कर लिया था। विक्रम पर ही पीड़िता को बहला-फुसलाकर होटल ले जाने का आरोप है। गौरतलब है कि बीते 27 सितंबर को बेगुसराय थानाक्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31 के पास एक होटल में इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया था।
पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। ट्रायल चलेगा और संभव है कि कोर्ट उन्हें कड़ी से कड़ी सजा सुनाए, लेकिन युवती जिस ट्रॉमा से गुजरी उसकी भरपाई कौन करेगा। इस घटना को जिस तरीके से अंजाम दिया गया, सवाल उसपर है कि लोगों में कानून का खौफ क्यों नहीं है। मंत्री अशोक चौधरी ने तो पल्ला झाड़ लिया है कि सरकार घटनाओं को रोक नहीं सकती। सवाल है कि फिर किससे सवाल किया जाये।