रांची:
Ranchi News: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि जैक (JAC) ने बिना आवश्यक जांच और दस्तावेजों की समीक्षा किए कई वित्त रहित माध्यमिक विद्यालयों को स्थापना अनुमति दे दी। यह मामला स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर की अध्यक्षता में हुई विभागीय अनुदान समिति की बैठक में सामने आया। बैठक के दौरान अनुदान से संबंधित विद्यालयों के अपील आवेदनों की समीक्षा की जा रही थी।

जैक से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण, दोषियों पर कार्रवाई की अनुशंसा
मामले को गंभीरता से लेते हुए समिति ने झारखंड माध्यमिक विद्यालय स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति (शर्त एवं बंधेज) नियमावली, 2008 के प्रावधानों के विपरीत विद्यालयों को स्थापना अनुमति देने पर जैक से स्पष्टीकरण मांगने की अनुशंसा की है। साथ ही, गड़बड़ी प्रमाणित होने पर जिम्मेदार पदाधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। विभाग की ओर से इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
107 विद्यालयों ने किया था अनुदान के लिए अपील
समीक्षा के दौरान अनियमितताएं सामने आने के बाद संबंधित विद्यालयों के अनुदान पर रोक लगा दी गई है। साथ ही उनके अपील आवेदन भी खारिज कर दिए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान नहीं मिलने से प्रभावित कुल 107 माध्यमिक विद्यालयों ने दोबारा अनुदान पाने के लिए विभाग के समक्ष अपील की थी। इनमें से 28 विद्यालयों के आवेदन नियमावली में तय शर्तें पूरी नहीं करने के कारण अस्वीकार कर दिए गए।

स्थापना अनुमति के बाद स्थायी प्रस्वीकृति जरूरी
दरअसल, जैक की ओर से माध्यमिक विद्यालयों को शुरुआती चरण में स्थापना अनुमति दी जाती है। इसके बाद निर्धारित मानकों और शर्तों को पूरा करने पर विद्यालयों को स्थायी प्रस्वीकृति (मान्यता) प्रदान की जाती है। राज्य सरकार हर साल प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालयों के अलावा स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालयों को भी अनुदान उपलब्ध कराती है।
किसी स्कूल में शासी निकाय नहीं, तो कहीं पर्याप्त वर्गकक्ष का अभाव
अनुदान समिति की समीक्षा में पाया गया कि अनुदान की स्वीकृति नहीं पाने वाले अधिकांश विद्यालयों में शासी निकाय का गठन नहीं किया गया था। वहीं, कुछ स्कूलों में निर्धारित संख्या के अनुसार वर्गकक्ष उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उन्हें स्थापना अनुमति दे दी गई थी। इसके अलावा, कई विद्यालय ऐसे भी मिले, जिन्होंने स्थापना अनुमति मिलने के कई साल बाद भी स्थायी प्रस्वीकृति हासिल नहीं की। इसकी वजह यह थी कि वे मान्यता के लिए जरूरी मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे थे। समिति ने संबंधित कमियों का उल्लेख करते हुए इन विद्यालयों के अपील आवेदन खारिज कर दिए।

दुमका के दो विद्यालयों में वर्गकक्ष और नामांकन पर सवाल
दुमका के विजय राय जनजाति माध्यमिक विद्यालय के मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) की रिपोर्ट में बताया गया कि विद्यालय में केवल छह वर्गकक्ष उपलब्ध हैं, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसी जिले के सूरज मंडल माध्यमिक विद्यालय के संबंध में डीईओ की रिपोर्ट में महज तीन वर्गकक्ष होने की जानकारी दी गई। रिपोर्ट में नामांकन के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि ऐसा प्रतीत होता है कि विद्यालय ने अनुदान प्राप्त करने के उद्देश्य से नामांकन की संख्या दिखाई है। हालांकि, निरीक्षण के दौरान दर्ज नामांकन के अनुपात में विद्यार्थियों की उपस्थिति नहीं मिली।
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सरायकेला-खरसावां के स्कूल में शासी निकाय का गठन नियमानुसार नहीं
वहीं, सरायकेला-खरसावां के शास्त्री स्मारक हाई स्कूल, जैकाना के संबंध में जांच रिपोर्ट में बताया गया कि विद्यालय के शासी निकाय का गठन नियमानुसार नहीं किया गया था। समिति की समीक्षा में ऐसे कई अन्य विद्यालयों की कमियां भी सामने आई हैं, जिन्होंने स्थापना अनुमति मिलने के वर्षों बाद भी स्थायी प्रस्वीकृति नहीं ली है।