जामताड़ा:
Jamtara News: जामताड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहड़ा गांव के पास रविवार की अहले सुबह करीब चार बजे एक बड़ा सड़क हादसा (Road Accident) होते-होते टल गया। बिहार से कोलकाता जा रहा बालू लदा 14 पहिया हाईवा (Highwa) अनियंत्रित होकर एक पेड़ से टकराने के बाद सड़क किनारे खेत में जा घुसा। इस दुर्घटना (Accident) में वाहन का अगला शीशा और केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि सौभाग्यवश चालक (Driver) और सह-चालक (Helper) बाल-बाल बच गए।

दुर्घटना की वजह और राहत कार्य
वाहन चालक के अनुसार, मोहड़ा के समीप सामने से आ रहे एक ट्रक को बचाने के प्रयास में उसने अचानक वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। अनियंत्रित हाईवा सीधे पेड़ से टकराते हुए बगल के खेत में उतर गया। हादसे के बाद तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना मिलते ही जामताड़ा थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। इसके बाद खेत में फंसे भारी-भरकम 14 पहिया हाईवा को बाहर निकालने के लिए दो जेसीबी और एक बड़ी क्रेन की मदद ली गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की काफी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहन को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
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बालू के स्रोत और फर्जीवाड़े पर गहराया संदेह
हादसे के बाद इलाके में बालू के अवैध परिवहन और उसके वास्तविक स्रोत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जामताड़ा के रास्ते रोजाना रात के अंधेरे में इसी तरह के 15 से 20 हाईवा अवैध रूप से बालू लेकर गुजरते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि ये सभी वाहन धनबाद जिले के टुंडी क्षेत्र स्थित विभिन्न बालू घाटों से बालू उठाते हैं और करमदाहा, देवालबाड़ी, जुम्मन मोड़, पंडेडीह तथा नारायणपुर के रास्ते जामताड़ा होकर पश्चिम बंगाल की ओर निकल जाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वाहनों पर बालू धनबाद के टुंडी से लोड किया जाता है, जबकि जांच से बचने के लिए चालान बिहार के चकाई क्षेत्र का दिखाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
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प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जीपीएस-टोल रिकॉर्ड खंगालने की मांग
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित खनन विभाग से मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाईवा वास्तव में बिहार के चकाई से बालू ला रहा था, तो उसके रूट की पड़ताल होनी चाहिए। वहीं, अगर बालू टुंडी से उठाया गया है, तो चालान की वैधता और राजस्व चोरी के खेल की परतें खुलनी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि दुर्घटनाग्रस्त हाईवा के चालान, जीपीएस (GPS) डेटा, फास्टैग और टोल टैक्स रिकॉर्ड की कड़ाई से जांच की जाए। उनका कहना है कि इस जांच से स्पष्ट हो जाएगा कि बालू कहां से लोड हुआ था और चालान नियमानुसार वैध है या यह किसी बड़े अंतरराज्यीय अवैध बालू नेटवर्क का हिस्सा है। फिलहाल, किसी के हताहत न होने से राहत है, लेकिन प्रशासन के रुख पर सभी की निगाहें टिकी हैं।