द फॉलोअप डेस्क
नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध और कथित सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। देश में जारी हिंसा और तनावपूर्ण हालात के बीच अब तक पाँच मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, वहीं प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन बैठक बुलाई है। सोशल मीडिया पर बैन लगाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। जनरेशन Z द्वारा नेतृत्व किए जा रहे इन विरोध प्रदर्शनों में राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

स्थिति को काबू में लाने के लिए काठमांडू और उसके आसपास के इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने कई मंत्रियों के निजी आवासों पर हमला किया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर के घर पर भी हमला होने की पुष्टि हुई है। मंगलवार सुबह ललितपुर के सुनाकोठी क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के आवास में आग लगा दी। इससे पहले उन्होंने घर पर पत्थरबाजी भी की। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि आगजनी की घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यह घटना देश में बढ़ती अस्थिरता की ओर इशारा करती है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक गृह मंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, और नेपाली कांग्रेस से जुड़े शेखर कोइराला गुट के एक वरिष्ठ नेता समेत कुल पाँच मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। मंत्री अधिकारी ने सरकार की उस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इस्तीफा दिया जिसमें एक ही दिन में दर्जनों लोगों की जान चली गई। गृह मंत्री लेखक ने प्रदर्शन से निपटने में सरकारी विफलता और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ा। इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने भी स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए संवेदनाएं प्रकट की हैं। बयान में कहा गया, “नेपाल में जारी घटनाक्रम पर हमारी कड़ी नजर है। कई युवाओं की मृत्यु से हम अत्यंत दुखी हैं। मृतकों के परिजनों के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हम सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील करते हैं।”
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मंत्रालय ने नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। नेपाल की यह स्थिति दर्शाती है कि जनता के असंतोष और सरकार की जवाबदेही के बीच तनाव किस कदर बढ़ चुका है। आने वाले दिनों में यह देखा जाना बाकी है कि सरकार इस संकट से कैसे निपटती है।