द फॉलोअप डेस्क
40 महीने की सरकार एक भी नीति स्पष्ट रूप से लागू नहीं कर सकी। ना नीति बनी और और न युवाओं को नौकरी मिली। मुख्यमंत्री से पूछा जाना चाहिए कि जिन गुमान के साथ जोहार यात्रा पर निकले थे उसे बंद क्यों कर दिया गया और जोहार यात्रा का आधार क्या था? यह बातें सामाजिक न्याय मार्च के बाद हरमू मैदान में आयोजित सभा में आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने कही। उन्होंने कहा कि सच यह है कि 1932 का वादा करके 2023 लागू कर दिया गया। अब 60-40 का एक नया फार्मूला आया है, लेकिन मुख्यमंत्री इस फार्मूले पर कभी चर्चा नहीं करते। बताते चलें कि बापू वाटिका मोराबादी से आजसू की ओर से सामाजिक न्याय मार्च निकाला गया। इसके बाद हरमू मैदान में विशाल सभा का आयोजन हुआ। जिसमें सुदेश महतो ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री का पद लर्निंग स्कूल नहीं हो सकता। जनभावना के अनुरूप नीतियां बनाने और फैसले लेने के लिए सरकार बनती है। जिनमें कोई नेतृत्व क्षमता और विजन नहीं था उन्हें सत्ता मिली। नतीजा हुआ कि 40 महीने में राज्य को सामाजिक और राजनीतिक तौर पर बड़ी क्षति हुई है। ओबीसी, एसटी और एससी खूब छले गए हैं।

सरकार की नीयत में शुरू से है खोट
सरकार की नीयत पर सुदेश से सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नीयत नेक हो तो नीतियां सही बनती हैं। लेकिन राज्य सरकार की नीयत में शुरू से खोट है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्री सदन में कुछ बोलते हैं बाहर कुछ, जबकि, कैबिनेट में फैसले कुछ और लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय नीति, नियोजन नीति, ओबीसी आरक्षण, ट्रिपल टेस्ट विस्थापन नीति, आंदोलनकारियों के मान-सम्मान तमाम अहम विषयों की सरकार ने अनदेखी की। जातीय जनगणना सामाजिक न्याय का आधार है, लेकिन जातीय जनगणना कराने के प्रति सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं है। जबकि हम और हमारी पार्टी जातीय जनगणना लगाकर कराने के लिए लगातार आवाज उठाती रही है।

युवा सड़क पर आंदोलन करने को हैं विवश
युवा सड़कों पर आंदोलन करने को विवश हैं। बदले में उन्हें लाठियां खानी पड़ रही हैं। सुदेश ने कहा कि निजी संस्थानों में 75 प्रतिशत स्थानीय को काम देने का कैबिनेट फैसला लिया गया लेकिन जब स्थानीय नीति ही तय नहीं हुई तो इसका लाभ किन्हें मिलेगा। झारखंड जिस दौर से गुजर रहा है उसमें साफ दिखता है और आज और कल दोनों को बर्बाद किया जा रहा।

40 महीने की सरकार को जगाया नहीं जाता
सामाजिक न्याय मार्च और आंदोलन के संबंध में सुदेश ने कहा कि वे इसके जरिए सरकार को जगाने नहीं आए हैं। सरकार को जगाने का समय अब खत्म हो गया है। 40 महीने की सरकार को जगाया नहीं जाता। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन को पद पर बैठने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। झारखंड की जनता के खड़ा होने और सरकार के काम का मूल्यांकन करने का समय है। अगले 20 महीने तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। इस मार्च के जरिए आजसू के कार्यकर्ता संकल्प लेकर गांव-गांव जाएं, हर घर परिवार से जुड़ें। समाजिक न्याय हमारी लड़ाई का आधार है।

भ्रष्टाचार को बना दिया शिष्टाचार, हर पद की लगती है बोली
झारखंड में भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बना दिया गया है। हेमंत सोरेन कहते हैं कि केंद्र सरकार की एजेंसियां उन्हें तंग कर रही हैं। सोरेन यह क्यों नहीं मानते कि राज्य की नौकरशाही और नेतृत्व दोनों गैर जवाबदेह है। सरकार का मतलब हेमंत सोरेन उनके परिवार का विकास है। यहां हर पद की बोली लगती है। दान के लिए जो तैयार होगा उसे ऊंचा व मनचाहा पद मिलेगा। बिना चढ़ावा के कोई काम नहीं होता। 40 महीने की सरकार में भ्रष्टाचार के मामले में किसी को दंडित नहीं किया गया। सुदेश ने एयर एंबुलेंस की योजना पर तंज कसा और कहा कि राज्य की साधारण और बड़ी आबादी को रोड एंबुलेंस और मुकम्मल प्राथमिक इलाज तो पहले मुहैया करा दें।

झारखंड में निकाय चुनाव नहीं होने की जिम्मेदार है सरकार
पंचायत चुनाव के समय भी सरकार ने ओबीसी आरक्षण की अनदेखी की थी। हमने ट्रिपल टेस्ट के लिए पंचायत चुनाव के समय ही आवाज उठाई थी। पार्टी के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक गए। सुदेश ने कहा कि निकाय चुनाव नहीं होने के लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार है। अब सरकार को निकायों को अफसरों और बाबुओं के हवाले करने की बजाय विस्तार देना चाहिए। जातीय जनगणना और ट्रिपल टेस्ट इस राज्य की जरूरत है और हेमंत सोरेन सरकार इससे मुंह मोड़ रही है।

ट्रिपल टेस्ट को लेकर गंभीर नहीं है सरकार- चंद्रप्रकाश चौधरी
पिछड़ों को पंचायत चुनाव में आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात बताते हुए चंद्र प्रकाश चौधरी ने कहा कि मैंने याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट आदेश दिया कि राज्य में अगला जो भी चुनाव हो, उससे पहले ट्रिपल टेस्ट सुनिश्चित हो। लेकिन पिछड़ा विरोधी सरकार ने इस आदेश की अवमानना करते हुए नगर निकाय चुनाव में भी पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों को अनारक्षित कर दिया। इसको लेकर पुनः सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन सरकार ने इतने महीनों बाद भी ना ट्रिपल टेस्ट कराया और ना ही इस दिशा में कोई पहल की। इसके विपरीत राज्य के 34 निकाय परिषद के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त कर दिया गया तथा सभी शक्तियां व कार्य अब प्रशासक संभालेंगे।

लूट और झूठ ही हेमंत सरकार की है असली पहचान- राममचंद्र सहिस
पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस ने कहा कि झूठ और लूट बुनियाद पर चल रही हेमंत सोरेन सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए जनता तैयार है। फर्जी दावे और लोकलुभावन वादे करना ही इस सरकार की पहचान है। सत्ता में आते ही ये बेरोजगारी भत्ता, रोजगार, आरक्षण, स्थानीय नीति, नियोजन नीति, सरना धर्म कोड की बात भूल गए।

सुदेश ने किया मार्च का नेतृत्व
मोराबादी स्थित बापू वाटिका से निकाले गए सामाजिक न्याय यात्रा निकाली गई। कचहरी चौक, रातू रोड होते हुए यह मार्च हरमू मैदान पहुंचा। लगभग 6 किलोमीटर तक इस मार्च की अगुवाई खुद सुदेश महतो ने की। मार्च में ‘वोट हमारा राज तुम्हारा’, धोखेबाज हुकूमत की हर दीवार हिलाने निकले हैं जैसे नारे खूब लगे। इस मार्च में चंद्रप्रकाश चौधरी, डॉ. लंबोदर महतो, सुनिता चौधरी, रामचंद्र सहिस, उमाकांत रजक, राजेंद्र मेहता, देवशरण भगत, हसन अंसारी, रोशनलाल चौधरी, हरेलाल महतो, शालिनी गुप्ता, नीरु शांति भगत, निर्मला भगत, यशोदा देवी, तरुण गुप्ता, अर्जुन बैठा, भरत कांशी, रामधन बेदिया, तिवारी महतो, अनूप पांडेय, नजरूल हसन हासमी, विकास राणा, संजय महतो, तिवारी महतो, नंदू पटेल, काशी नाथ सिंह, रवि शंकर मौय, माधव चंद्र महतो, लाल गुड्डू नाथ शाहदेव, राधेश्याम गोश्वामी, राजेंद्र शाही मुंडा, बीणा चौधरी, बनमाली मंडल इत्यादि मुख्य रूप से शामिल थे।

इन 7 मांगों को लेकर निकाली गई सामाजिक न्याय यात्रा
- खतियान आधारित स्थानीय एवं नियोजन नीति लागू करो
- जातीय जनगणना एवं पिछड़ों को आबादी अनुसार आरक्षण सुनिश्चित करो
- पूर्व में जो जातियां अनुसूचित जनजाति की सूची में थी, उन्हें पुनः अनुसूचित जनजाति में शामिल करो
- सरना धर्म कोड लागू करो
- बेरोजगारों को रोज़गार दो
- झारखंड के संसाधनों की लूट बंद करो
- झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान दो
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