द फॉलोअप डेस्क
छतरपुर थाना क्षेत्र के हुटुगदाग पंचायत के इटकदाग गांव में शनिवार की संध्या एक झोपड़ी में आग लगने से एक दिव्यांग वृद्ध गंभीर रूप से झुलस गए। वृद्ध की पहचान 60 वर्षीय घूरन भुइयां के रूप में की गई है। मिली जानकारी के अनुसार, घूरन भुइयां अपने घर से दूर चना के खेत के पास बनाई गई झोपड़ी में रहते थे, जहां वह प्रतिदिन की तरह नील गायों से अपनी चना की खेती को बचाने का काम कर रहे थे। इस दौरान, कड़कड़ाती ठंड से बचने के लिए उन्होंने अपने पोते से आग जलाने को कहा। लेकिन उनका पोता नाबालिक होने के कारण सही से समझ नहीं पाया और झोपड़ी के अंदर ढेर सारी लकड़ियां जमा कर आग लगा दी। देखते ही देखते आग विकराल रूप ले चुकी थी और गन्ने की फूस से बनी झोपड़ी में आग फैल गई। चूंकि घूरन भुइयां दोनों पैरों से विकलांग थे, वह झोपड़ी से बाहर नहीं निकल पाए और झोपड़ी में ही फंसे रह गए। इस दौरान उनका पोता गांव में दौड़कर गया और लोगों को आग की जानकारी दी। जब तक ग्रामीण आग बुझाते, घूरन बुरी तरह झुलस चुके थे।
ग्रामीणों ने इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी, लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं होने के कारण घूरन की जलन से हालत बिगड़ती रही। घटना लगभग शाम 6 बजे की बताई जा रही है। घटना की जानकारी जब बीडीओ आशीष कुमार साहू को मिली तो उन्होंने तुरंत अनुमंडलीय चिकित्सा प्रभारी को मदद के लिए भेजा। इसके बाद लगभग रात 9 बजे एंबुलेंस गांव पहुंची, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद, गांव वालों ने घूरन को खाट पर लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। उन्हें अनुमंडलीय अस्पताल लाकर प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए एमएमसीएच मेदनीनगर रेफर किया गया। वहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए रिम्स रांची के लिए भी रेफर किया गया।
घूरन भुइयां को पूर्व में दो बार लकवा का अटैक आ चुका था, जिससे वह अपने पैरों पर चलने में असमर्थ थे और घिसटकर चलते थे। उनका एक बेटा है, जो दूसरे राज्य में मजदूरी का काम करता है। घटना के समय उनके घर के लोग मौजूद नहीं थे, केवल उनका नाबालिक पोता ही साथ में था। आग लगने के बाद, पोता तो बच गया, लेकिन घूरन गंभीर रूप से झुलस गए। उनके कमर से नीचे का हिस्सा लगभग 80 प्रतिशत झुलस गया था। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस तीन घंटे देर से पहुंची, इस दौरान घूरन जलन से छटपटाते रहे, जिसे देख परिजन और गांव के लोगों की आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
