नंदलाल तुरी
नववर्ष 2026 की शुरुआत पाकुड़ जिले में केवल उत्सव तक सीमित नहीं रही, बल्कि “सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा” के संकल्प के साथ एक नई सामाजिक जागरूकता की मिसाल कायम की गई। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026 के अंतर्गत “सीख से सुरक्षा, टेक्नोलॉजी से परिवर्तन” थीम पर आधारित एक अनोखा और संवेदनशील अभियान सिद्धू कान्हू मुर्मू पार्क के समीप आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने गांधीवादी शैली अपनाते हुए आम नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया। नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों को गुलाब का फूल भेंट कर सम्मानित किया गया, जबकि बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और ट्रिपल लोडिंग करने वाले चालकों को चालान के बजाय माला पहनाकर नियमों का पालन करने का संदेश दिया गया।
अभियान का नेतृत्व कर रहे उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएँ जीवन और परिवार को गहरे संकट में डाल देती हैं। उन्होंने कहा कि यह सोच छोड़नी होगी कि किस्मत साथ देगी। सुरक्षा ही सबसे बड़ा कवच है। हेलमेट, सीट बेल्ट और निर्धारित गति सीमा का पालन करके ही हम अपने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित रख सकते हैं। जिला परिवहन पदाधिकारी मिथिलेश कुमार चौधरी ने कहा कि हेलमेट सिर की सुरक्षा के लिए है, न कि घर में शोपीस के लिए। दुर्घटना बिना सूचना के आती है, इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। उपायुक्त ने नशे में वाहन चलाने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि यह न केवल अपराध है, बल्कि जानलेवा भी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि कोई भी व्यक्ति नशे की हालत में वाहन न चलाए और दूसरों को भी ऐसा करने की अनुमति न दें।
झारखंड सरकार के निर्देशानुसार वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 1 से 31 जनवरी 2026 तक जिले भर में जागरूकता रथ, स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और विशेष वाहन जांच अभियान चलाए जाएंगे। सड़क सुरक्षा नियमों के अंतर्गत दोपहिया वाहन पर चालक और पिलियन राइडर दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य है, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का प्रयोग आवश्यक है, ओवर-स्पीडिंग और अनावश्यक हॉर्न से बचें और केवल लाइसेंसधारी व्यक्ति को ही वाहन चलाने दें।
