द फॉलोअप डेस्क
झारखंड स्थित गढ़वा जिला के भवनाथपुर प्रखंड में लरहरा गांव एक ऐसा गांव है, जहां पिछले 400 सालों से एक भी केस थाने में नहीं पहुंचा। बताते चलें कि इस गांव में कोरवा जनजाति के लोग रहते हैं, जो आदिम जनजाति की श्रेणी में आते हैं। दरअसल यह खुलासा तब हुआ जब पिछले तीन दिन पहले गांव में एक पेचीदा मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार इस गांव के ही एक व्यक्ति जो चार बच्चों के पिता है और उसी गांव की रहने वाली एक महिला जो चार बच्चों की मां है, उन दोनों को गांव वालों ने आपत्तिजनक स्थिति में देखा। बताया जा रहा है कि दोनों रिश्ते में चाची-भतीजा हैं। दरअसल यह मामला तुल पकड़ लिया। क्योंकि मामला सामाजिक मर्यादा से जुड़ा हुआ है इसलिए तत्काल पंचायत बुलाई गई। इसी बीच महिला द्वारा थाने में गांव के लोगों पर प्रताड़ित करने का शिकायत दर्ज कराई गई। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस एक्शन में आ गई। बताया जा रहा है कि जब थाने से बुलावा आया, तो गांव के सभी लोग एकजुट होकर वहां पहुंचे। पुलिस द्वारा पूछताछ में ग्रामीणों ने बताया कि आजादी से लेकर आज तक गांव के किसी भी विवाद में थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है और न ही होगा। हालांकि अंत में पुलिस को गांव वालों की बात मानना पड़ा और बिना हस्तक्षेप के पंचायत ने दोनों को सख्त हिदायत और माफी के साथ मामले को सुलझाया गया।

वहीं, लरहरा गांव के ही गांव के बुजुर्ग रामपृत कोरबा, बिठल कोरबा और मुंद्रिका कोरबा, मणि कोरबा और सुरेंद्र कोरबा ने कहा कि हमारे यहां पूर्वजों के समय से ही यह नियम चलते आ रहा है कि गांव का विवाद पंचायत स्तर पर ही सुलझा लिया जाता है। गांव में इससे आपसी भाईचारा बना रहता है। बताते चलें कि लरहरा गांव में लगभग 40 घर हैं। जानकारी के अनुसार लरहरा गांव के लोगों का मुख्य पेशा जंगल से लकड़ी काटना और उसे भवनाथपुर बाजार में ले जाकर बेचना है। झारखंड स्थित गढ़वा जिला के भवनाथपुर प्रखंड में लरहरा गांव एक ऐसा गांव है, जहां पिछले 400 सालों से एक भी केस थाने में नहीं पहुंचा। बताते चलें कि इस गांव में कोरवा जनजाति के लोग रहते हैं, जो आदिम जनजाति की श्रेणी में आते हैं। दरअसल यह खुलासा तब हुआ जब पिछले तीन दिन पहले गांव में एक पेचीदा मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार इस गांव के ही एक व्यक्ति जो चार बच्चों के पिता है और उसी गांव की रहने वाली एक महिला जो चार बच्चों की मां है, उन दोनों को गांव वालों ने आपत्तिजनक स्थिति में देखा। बताया जा रहा है कि दोनों रिश्ते में चाची-भतीजा हैं। दरअसल यह मामला तुल पकड़ लिया। क्योंकि मामला सामाजिक मर्यादा से जुड़ा हुआ है इसलिए तत्काल पंचायत बुलाई गई।
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इसी बीच महिला द्वारा थाने में गांव के लोगों पर प्रताड़ित करने का शिकायत दर्ज कराई गई। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस एक्शन में आ गई। बताया जा रहा है कि जब थाने से बुलावा आया, तो गांव के सभी लोग एकजुट होकर वहां पहुंचे। पुलिस द्वारा पूछताछ में ग्रामीणों ने बताया कि आजादी से लेकर आज तक गांव के किसी भी विवाद में थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है और न ही होगा। हालांकि अंत में पुलिस को गांव वालों की बात मानना पड़ा और बिना हस्तक्षेप के पंचायत ने दोनों को सख्त हिदायत और माफी के साथ मामले को सुलझाया गया। वहीं, लरहरा गांव के ही गांव के बुजुर्ग रामपृत कोरबा, बिठल कोरबा और मुंद्रिका कोरबा, मणि कोरबा और सुरेंद्र कोरबा ने कहा कि हमारे यहां पूर्वजों के समय से ही यह नियम चलते आ रहा है कि गांव का विवाद पंचायत स्तर पर ही सुलझा लिया जाता है। गांव में इससे आपसी भाईचारा बना रहता है। बताते चलें कि लरहरा गांव में लगभग 40 घर हैं। जानकारी के अनुसार लरहरा गांव के लोगों का मुख्य पेशा जंगल से लकड़ी काटना और उसे भवनाथपुर बाजार में ले जाकर बेचना है।