रांची:
सरयू राय (Saryu Rai) पर उनके मंत्री पद पर रहते हुए किए गए भ्रष्टाचार के मामले में जी कुमार के द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) झारखंड में स्पष्ट शिकायतें की गई थी। इसमें यह कहा गया था कि सरयू राय के द्वारा स्वयं के एनजीओ युगांतर भारती के माध्यम से सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया गया है। उनके द्वारा बिना टेंडर के आहार पत्रिका छपवाने में भ्रष्टाचार किया गया है। बाजार दर से अधिक दर पर वॉइस मैसेजेस का कार्य आदेश जारी करवा कर भ्रष्टाचार किया गया है। उनके द्वारा अपने ही विभाग में अपने करीबी व्यक्ति को बिना नियम के नियुक्ति दे दी गई।

बाजार दर से अधिक दर पर वॉयस मैसेज का कार्यादेश जारी
इसके साथ ही बाजार दर से अधिक दर पर वॉयस मैसेज का कार्यादेश जारी किया गया। अपने ही विभाग में करीबी व्यक्ति को बिना नियम के नियुक्त किया। ACB ने मामले की जांच रिपोर्ट में कहा है कि प्रथम दृष्टया गड़बड़ी प्रतीत होती है। इसलिए पीई दर्ज करने की अनुमति मिले। आरोप था कि युगांतर भारती झारखंड में निबंधित भी नहीं है। लेकिन उसे पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सभी जिलों में पानी की जांच के नाम पर करोड़ों की अग्रिम राशि दी।

ACB द्वारा सभी मामलों की कराई गई जांच
जानकारी मिल रही है कि राज्य सरकार की एजेंसी एसीबी के द्वारा उन सभी मामलों की जांच कराई गई है। जो रिपोर्ट सौंपा गया है उसमें यह स्पष्ट हुआ है कि सरयू राय के द्वारा पद का दुरुपयोग किया गया और भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया। इस संदर्भ में एसीबी में शिकायतकर्ता जी कुमार के परिवाद के आवेदन के आलोक में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पाया कि प्रथम दृष्टया आरोप सही हैं। इसके बाद इस संबंध में आदेश पारित कर इस मामले में प्राथमिक जांच (PE) का आदेश निर्गत करने का पत्र मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग को भेजा गया।