द फॉलोअप डेस्क
भाजपा प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी फिर से पिछड़ा समाज का हितैषी बनने का दिखावा कर रही है। जबकि कांग्रेस पार्टी का चाल, चरित्र और चेहरा पिछड़ा विरोधी है। पिछड़ों का विरोध कांग्रेस पार्टी के डीएनए में शामिल है। ये वही कांग्रेस पार्टी है जिसने पिछड़ा वर्ग आयोग को कभी भी संवैधानिक दर्जा नहीं दिया। मंडल कमीशन की रिपोर्ट को वर्षों तक ठंडे बस्ते में डाल दिया। जिसे वीपी सिंह की सरकार ने लागू किया। एक परिवार को महिमा मंडित करने में अनेक विद्वान और जनाधार वाले पिछड़े नेताओं को कांग्रेस पार्टी ने बार बार अपमानित किया।"
उन्होंने आगे कहा, "आज कांग्रेस पार्टी पिछड़ों की हितैषी बनने का नाटक कर रही जबकि कांग्रेस समर्थित राज्य सरकार में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया बिना पिछड़ा समाज के आरक्षण के संपन्न हुए। कांग्रेस पार्टी तो पिछड़ों के आरक्षण को मुस्लिम समाज के लिए आरक्षित कर रही है और झारखंड में पिछड़ों के हित की बात कर रही।यह तो साफ तौर पर उसकी नियत को दिखाता है। आज तक राज्य सरकार ने ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जो आरक्षण के प्रतिशत को बढ़ाने केलिए पहली संवैधानिक जरूरत है।"
उन्होंने आगे कहा, "प्रदीप यादव जी को पता होगा कि बाबूलाल मरांडी जी के मंत्रिमंडल में जिसमे वे स्वयं भी शामिल थे पिछड़ों के आरक्षण को बढ़ाने की कोशिश की गई थी। लेकिन कोर्ट के निर्देश में उसे लागू नहीं किया जा सका। भाजपा सरकार पिछड़ों के कल्याण केलिए समर्पित है।आज 11 वर्षों से पिछड़ा समाज से आनेवाले गरीब का बेटा भारत का लोकप्रिय प्रधानमंत्री है। उनके कैबिनेट में दर्जनों मंत्री पिछड़े समाज से हैं। पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मोदी सरकार ने ही दिया। कांग्रेस पार्टी को अगर पिछड़ों की चिंता है तो राज्य में होने वाले नगर निकाय चुनाव में पिछड़ों को आरक्षण दिलाना सुनिश्चित करे। केवल बयानबाजी से पिछड़े समाज का कल्याण नहीं होगा।उसे धरातल पर उतारने की जिम्मेवारी भी राज्य सरकार की है।"
