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कांग्रेस की भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति ध्वस्त, ECI में सर्वसम्मति से हुए फैसले- आदित्य साहू

कांग्रेस की भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति ध्वस्त, ECI में सर्वसम्मति से हुए फैसले- आदित्य साहू

द फॉलोअप डेस्क, रांची:
 

झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस की भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति ध्वस्त हो गई। उन्होंने कहा कि देश की जनता की जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने से कांग्रेस की मानसिक स्थिति खराब हो गई है। आदित्य साहू ने कहा कि लूट, झूठ और फरेब कांग्रेस पार्टी का स्वाभाव है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों निर्वाचन आय़ुक्तों की संयुक्त प्रेस वार्ता से साफ हो गया कि कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष झूठ और सनसनी फैलाने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखी चिट्ठी दरअसल, किसी नीतिगत विषय या SIR से संबंधित नहीं थी और अखबार की रिोपर्ट कोरी कल्पना पर आधारित है। 

कांग्रेस को तथ्यों का सम्मान करना चाहिए
आदित्य साहू ने कहा कि SIR के फॉर्म-6 के घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट पहले ही वैध ठहरा चुका है। विपक्ष की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश फिर से एक बार नाकाम हुई। कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद कांग्रेस के आरोपों की वास्तविकता सामने आ गई है, ऐसे में कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जब भी विपक्ष जनता की अदालत में पराजित होता है, वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने लगता है। निर्वाचन आयोग के स्पष्ट और कड़े वक्तव्य ने विपक्ष के सभी झूठ और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है।

सुप्रीम कोर्ट SIR प्रक्रिया को वैध ठहरा चुका है
आदित्य साहू ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों (डॉ. एस. एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशी) की 26 सितंबर को अपराह्न 3 बजे बैठक हुई और उसके बाद एक ज्वाइंट प्रेस स्टेटमेंट चुनाव आयोग की ओर से जारी किया गया है जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देश भर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। 24 जून 2025 का मूल आदेश हो, या विभिन्न चरणों (12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों व 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों) की समय-सारणी, सभी निर्णय पूरे आयोग की पूर्ण सहमति से लिए गए हैं। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर झूठा कीचड़ उछालने का घिनौना काम कर रहा था।

प्रत्येक वोटर की भागीदारी सुनिश्चित करता है ECI
आदित्य साहू कहा कि विपक्ष केवल अफवाहें फैलाता है, जबकि आयोग जमीनी स्तर पर हर मतदाता की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है -चाहे वह रैन बसेरों, मजदूरों और बेघरों के लिए विशेष कैंप लगाना हो, या छूटे हुए लोगों के घरों पर जाकर बीएलओ द्वारा फॉर्म एकत्र करना हो।  उन्होंने कहा कि देश की जनता भली-भांति जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते हैं।

चुनाव आयोग के इस पूर्ण और सर्वसम्मत बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व को देश और संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।

2024 में ईवीएम को भारतीय लोकतंत्र के लिए 'ब्लैक बॉक्स' बताया था,चुनावी प्रक्रिया और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया, चुनाव आयोग को सत्ताधारी दल का कठपुतली बता चुके हैं जबकि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट बार-बार ईवीएम की सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्रमाणित कर चुके हैं तथा राहुल गांधी के झूठ को न्याय की अदालत ने खारिज किया है। इन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी। 

आदित्य साहू ने राहुल गांधी की ये गलतियां गिनाईं
उन्होंने पत्रकारों को याद कराते हुए कहा कि राहुल गांधी के द्वारा देश के प्रधानमंत्री को "चौकीदार चोर है" कहा गया, राफेल मामले  में खून की दलाली का अफवाह फैलाया गया, बालाकोट में भारतीय सैनिकों के द्वारा एयर स्ट्राइक पर भी सवाल उठाया सबूत मांगा गया, उन्होंने कहा था कि सरकार "जवानों के खून की दलाली कर रही है, जिसे सेना के शौर्य का अपमान माना गया।  

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद राहुल गांधी ने बयान दिया था कि "चीन के सैनिक हमारे जवानों को पीट रहे हैं।" सेना और सरकार दोनों ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की थी।
 

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