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छवि रंजन की गिरफ्तारी के बाद बाबूलाल ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना, कहा- सत्ता के साये में एक गिरोह करता था काम

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द फॉलोअप डेस्क
राजधानी में हुए जमीन घोटाले में रांची के पूर्व डीसी IAS छवि रंजन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। इसको लेकर बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि जमीन घोटालेबाज रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन को #ED द्वारा गिरफ़्तार करने की खबर से यह उजागर हुआ है कि हेमंत राज में कैसे कागजातों की हेराफेरी कर ज़मीन लूट के लिये सत्ता के साये में एक गिरोह का नेटवर्क काम करता था। मेरा दावा है कि इतने बड़े पैमाने हुए घोटाले में छवि रंजन अकेले नहीं हैं। इनके गोरखधंधे में दलाल, बिचौलियों और सत्ता से जुड़े लोगों के साथ ही पुलिस और प्रशासन के कई छोटे-बड़े लोग शामिल हैं जो दिन के उजाले ही नहीं रात के अंधेरे में भी ज़मीन लूटने का धंधा करवा कर लूट के माल में हिस्सा लेते थे।

इसलिए ईडी की रडार पर थे छवि

रांची के डीसी रहने के दौरान छवि के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर फर्जी कागजों के आधार पर जमीन की खरीद बिक्री की बात सामने आई। इनमें सबसे प्रमुख बरियातू स्थित सेना की जमीन थी जांच में यह सामने आया कि बरियातू में सेना की 4.55 एकड़ जमीन को फर्जी कागजात के जरिए कोलकाता के प्रदीप बागची ने जगत बंधु टी एस्टेट को बेच दी थी इस जमीन की सरकारी दर 20 करोड़ 75 लाख 84200 रुपये थी। लेकिन इसकी बिक्री महज 7 करोड़ शो की गई। इसमें भी 25 लाख रुपये प्रदीप बागची के खाते में आए थे बाकी बचे पैसों के संबंध में डीड में जानकारी दी गई कि इसे चेक से भुगतान किया गया। मगर जब ईडी ने चेक के जरिए भुगतान किए जाने की जांच की तो सामने आया कि खातों में पैसे गए ही नहीं। यानी, खरीद-बिक्री को सही दर्शाने के लिए चेक से राशि भुगतान की गलत जानकारी डीड में दी गई थी। बताया जा रहा है कि ईडी ने अपनी जांच में यह भी कहा परिजनों के खातों में बड़े ट्रांजेक्शन और लाभान्वित होने के सबूत ईडी को मिले हैं जमीन की रजिस्ट्री करने वाले सब रजिस्ट्रार घासीराम पिंगुआ ने भी अपने बयान में बताया था कि डीसी के आदेश पर उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री की थीरांची के बजरा में भी 7.16 एकड़ जमीन की घेराबंदी से लेकर म्यूटेशन तक में डीसी रहते छवि रंजन की भूमिका काफी संदेहास्पद रही