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बीमार पिता, मजदूरी करती मां और फुटबॉल का सपना, ओरमांझी की अनुष्का का एशिया अंडर-17 फुटबॉल में चयन

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द फॉलोअप डेस्क
संघर्षों के बीच चमकती झारखंड की बेटी अनुष्का कुमारी एक घर, जिसमें बरसात होते ही छत से पानी टपकने लगता है..एक पिता, जिनके पैर में गंभीर चोट है और ऑपरेशन के पैसे तक नहीं..एक मां, जो मजदूरी कर परिवार की जिम्मेदारी उठाती हैं और उसी घर से निकली एक बेटी, जो आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन में हो रहे एशिया अंडर-17 फुटबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही है। यह कहानी है झारखंड के ओरमांझी की रहने वाली अनुष्का कुमारी की जिसने हालातों से नहीं, हौसलों से लड़ना चुना।
अनुष्का के पिता लंबे समय से बीमार हैं। उनके पैर में गंभीर चोट है और डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इलाज आज तक संभव नहीं हो सका। परिवार की पूरी जिम्मेदारी अनुष्का की मां पर है, जो मजदूरी कर किसी तरह घर चलाती हैं। घर केवल दो कमरों का है, वह भी खपड़ा का बना हुआ। बरसात के दिनों में बारिश का पानी घर के अंदर घुस जाता है। आज के डिजिटल दौर में भी परिवार के पास स्मार्टफोन तक नहीं है। इन हालातों में अनुष्का का खेल की दुनिया तक पहुंचना किसी चमत्कार से कम नहीं था। करीब तीन वर्षों से अनुष्का हजारीबाग के कर्जन ग्राउंड स्थित छात्रावास में रहकर फुटबॉल की तैयारी कर रही हैं। वह ओरमांझी से निकलकर यहां तक पहुंचीं और नियमित अभ्यास, अनुशासन और कठिन परिश्रम से खुद को साबित किया। इस दौरान उन्होंने राज्यस्तरीय समेत कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
अनुष्का की खेल प्रतिभा करीब तीन वर्ष पहले एक फुटबॉल मैच के दौरान पहचानी गई। इसके बाद झारखंड सरकार द्वारा आयोजित प्रतिभा चयन परीक्षा में उनका चयन हुआ और छात्रावास में नामांकन मिला। यहीं से उनके सपनों को नई दिशा मिली। इस संघर्ष भरे सफर में अनुष्का की सबसे बड़ी ताकत बनीं उनकी बुआ। स्वयं पूर्व खिलाड़ी और वर्तमान में कोच रहीं बुआ ने अनुष्का की प्रतिभा को पहचाना और हर मोड़ पर आगे बढ़ने का हौसला दिया। उन्हीं के प्रयास से अनुष्का को सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिल सका। अनुष्का बताती हैं कि अभ्यास और मैच के दौरान भी उनका मन अक्सर घर की चिंता में उलझा रहता हैं पिता का इलाज, मां की मेहनत और घर की हालत। इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी मेहनत को देश ने भी सराहा। हाल ही में अनुष्का को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें सम्मान देकर प्रोत्साहित किया।

अब करीब 17 वर्ष की उम्र में अनुष्का का चयन एशिया अंडर-17 वर्ल्ड कप फुटबॉल प्रतियोगिता के लिए हुआ है, जो चीन में आयोजित की जाएगी। यह उपलब्धि न सिर्फ उनके लिए, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है। अनुष्का ने भावुक अपील करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि उनके पिता के इलाज की समुचित व्यवस्था सरकारी स्तर पर की जाए और उनके घर की स्थिति में सुधार हो, ताकि वह बिना किसी मानसिक चिंता के देश के लिए मैदान में उतर सकें। बीमार पिता और संघर्ष करती मां के बीच पली-बढ़ी अनुष्का आज उन हजारों बेटियों के लिए उम्मीद बन चुकी हैं, जो अभावों में भी सपने देखती हैं, अनुष्का की कहानी बताती है संघर्ष अगर ईमानदार हो, तो सफलता खुद रास्ता ढूंढ लेती है।

 

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