द फॉलोअप डेस्क
सफाई कर्मचारियों की बदहाली को लेकर अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा झारखंड प्रदेश ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर गंभीर चिंता जाहिर की है। आज सोमवार 28 जुलाई 2025 को महासभा के झारखंड मीडिया प्रभारी गोविंदा वाल्मीकि ने यह पत्र जारी करते हुए कहा कि राज्य में लगभग 14 लाख सफाईकर्मी कार्यरत हैं, लेकिन इनकी हालत बेहद दयनीय है। ये कर्मचारी आज भी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं, और न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित हैं।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि सफाई कर्मचारी पूरे राज्य, नगर और बस्तियों की सफाई का जिम्मा संभालते हैं, लेकिन खुद ही गंदगी में रहने को विवश हैं। न आवासीय सुविधा, न स्वास्थ्य सेवाएं, और न ही सम्मानजनक वेतन इन हालातों में जीवन यापन करना उनके लिए एक संघर्ष बन गया है।
इसके साथ ही ठेकेदारी प्रथा पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि एक कर्मचारी से चार लोगों का काम जबरन कराया जा रहा है, और ठेकेदारों द्वारा लगातार शोषण और मानसिक दबाव बढ़ाया जा रहा है। गोविंदा वाल्मीकि ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरी व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए झारखंड सरकार को सफाई कर्मचारी आयोग या बोर्ड का गठन करना चाहिए, जिसमें स्वयं सफाई कर्मचारियों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सरकार से अपील की है कि सफाई कर्मियों की अहम भूमिका को दरकिनार ना करते हुए उनके जीवन को सम्मान और सुरक्षा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
