द फॉलोअप डेस्क
पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एनटीपीसी, पुलिस-प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार को वर्षों से टारगेट किया जा रहा है और विस्थापन के मुद्दे पर आवाज उठाने की वजह से उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा गया। यहां तक कि जेल में भी उनके साथ प्रताड़ना की गई। अंबा प्रसाद ने कहा कि उनके परिवार से पिछले 15 वर्षों से कोई न कोई विधायक रहा है और पूर्व मंत्री भी रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में शायद ही किसी परिवार को इस तरह से निशाना बनाया गया हो। उन्होंने कहा कि आज भी वे विस्थापन की लड़ाई में लगभग अकेली पड़ गई हैं, जबकि राज्य और केंद्र सरकार दोनों इस मुद्दे पर उदासीन बनी हुई हैं।

उन्होंने एनटीपीसी, अडाणी और सीसीएल जैसी कंपनियों को “कॉर्पोरेट माफिया” बताते हुए कहा कि ये कंपनियां पुलिस-प्रशासन की मदद से विस्थापितों को परेशान कर रही हैं। अंबा प्रसाद ने दावा किया कि उनके संघर्ष के कारण ही मुआवजा राशि 5 लाख से बढ़कर 20-25 लाख रुपये तक पहुंची है, लेकिन इसके बावजूद विस्थापितों को न्याय नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें एनटीपीसी की ओर से तीन नोटिस मिले, जिनमें सीबीए एक्ट के तहत मुआवजा लेने की बात कही गई। वहीं दूसरी ओर बिल्डिंग डिवीजन मुआवजा निर्धारित करने की बात करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीपीसी ने अवैध तरीके से मुआवजा तय किया है, जबकि कंपनी खुद मानती है कि 24 जून 2008 को भूमि अधिग्रहण किया गया था।

अंबा प्रसाद ने कहा कि एनटीपीसी ने ट्रिब्यूनल कोर्ट में उनके खिलाफ केस किया, जबकि उन्होंने भी हाईकोर्ट में मामला दायर कर स्टे की मांग की थी। उनका आरोप है कि कंपनी ने कोर्ट में प्रार्थना की कि उनके घर को हटाया जाए और केस वापस लेने के बाद ही मुआवजा दिया जाए। इससे कंपनी की मंशा साफ झलकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोर्ट से स्टे ऑर्डर मिलने के बावजूद उनका घर तोड़ दिया गया। इस दौरान भारी संख्या में वाहन और पुलिस बल तैनात थे। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में उनके 20 से 30 लाख रुपये तक की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इसे उन्होंने झारखंड के रैयतों के लिए एक “थ्रेट मैसेज” बताया।

अंबा प्रसाद ने कहा कि एनटीपीसी के प्रभाव में पुलिस, प्रशासन और सरकार काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक बार भी मुख्यमंत्री ने उनकी स्थिति जानने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आज उनके साथ कोई खड़ा नहीं है, लेकिन इस कार्रवाई का जवाब जिम्मेदार लोगों को देना होगा। उन्होंने कहा कि “अबुआ नहीं, बबुआ सरकार चल रही है” और आरोप लगाया कि एनटीपीसी के इशारे पर पुलिस-प्रशासन काम कर रहा है तथा कोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पूरे मामले की निंदा करते हुए कहा कि यह संविधान और न्याय व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।