द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे अक्सर धरातल पर दम तोड़ते नजर आते हैं। ताज़ा मामला बुधवार को जामताड़ा जिले में देखने को मिला, जहाँ स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था के कारण एक 13 वर्षीय मासूम बच्ची की जान सांसत में पड़ गई। मिहिजाम थाना क्षेत्र के जियाजोड़ी गांव की रहने वाली 13 वर्षीय बच्ची को मंगलवार को सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरने की गंभीर समस्या के कारण जामताड़ा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को बच्ची की स्थिति बिगड़ते देख डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रांची रिम्स रेफर कर दिया। वहीं रांची जाने के लिए परिजनों की उम्मीद 108 एंबुलेंस पर टिकी थी, लेकिन सफर शुरू होते ही सिस्टम की खामियां उजागर हो गईं। जिस एंबुलेंस से बच्ची को रांची ले जाया जा रहा था, उसका AC (एयर कंडीशनर) पूरी तरह खराब था। उमस भरी गर्मी में एंबुलेंस के भीतर दमघोंटू माहौल ने मासूम की हालत और नाजुक कर दी।

मजबूरी में परिजनों को रास्ते भर एंबुलेंस रुकवाकर उसका मुख्य दरवाजा खोलना पड़ा। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस घटना में देखा गया कि परिजन हाथ वाले पंखे (बेना) से बच्ची को हवा दे रहे थे ताकि उसे थोड़ी राहत मिल सके। गंभीर मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट का दावा करने वाली 108 एंबुलेंस सेवा की यह हकीकत डराने वाली है। एक तरफ जहां विभागीय मंत्री और अधिकारी हाई-टेक सुविधाओं का दम भरते हैं, वहीं दूसरी ओर एक गंभीर मरीज को बुनियादी सुविधा के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ी। यह घटना स्पष्ट करती है कि जामताड़ा सदर अस्पताल से लेकर एंबुलेंस प्रबंधन तक जवाबदेही की भारी कमी है।
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