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"निजी दुख से बड़ा राज्य का कर्तव्य", नेमरा में महत्वपूर्ण फाइलें देख रहे सीएम हेमंत

"निजी दुख से बड़ा राज्य का कर्तव्य", नेमरा में महत्वपूर्ण फाइलें देख रहे सीएम हेमंत

द फॉलोअप डेस्क, रांची:

Jharkhand News: यदि आप मुख्यमंत्री जैसे बड़े संवैधानिक पद पर हों तो व्यक्तिगत दुख से ज्यादा बड़ा राज्य का कर्तव्य बन जाता है। सीएम हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) की यह तस्वीर इस बात की तस्दीक करती है। सीएम हेमंत ने बीते गुरुवार को मां रूपी सोरेन को मुखाग्नि दी है और शुक्रवार को अहम फाइलें निपटाते दिख रहे हैं। इन तस्वीरों में आप सीएम हेमंत की पोशाक देखिए। उन्होंने केवल धोती पहनी है और सफेद अंगोछे से बदन ढंका है। पैरों में चप्पल या जूते की जगह खड़ाऊं है। यह पोशाक शोक की परिचायक है। सीएम हेमंत को मातृशोक हुआ है। यह जीवन का सबसे बड़ा दुख है।

 

संवैधानिक जिम्मेदारी दुखों का इंतजार नहीं करती
हालांकि, वह बेटे होने  के साथ झारखंड प्रदेश के मुखिया भी हैं। संवैधानिक जिम्मेदारियां व्यक्तिगत दुखों का इंतजार नहीं कर सकतीं। सवा 3 करोड़ जनता का सवाल है। सीएम हेमंत इस वक्त अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं। आला अधिकारी वहीं पहुंचकर फाइलों पर सीएम का दस्तखत लेते हैं। सीएम हेमंत दो फर्ज निभा रहे हैं। पहले मुख्यमंत्री होने का, फिर बेटा होने का। 

बुधवार देर शाम को हुआ था मां रूपी सोरेन का निधन
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का बीते बुधवार की देर शाम को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थीं। रांची के हिल व्यू अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। मोरहाबादी में पार्थिव देह के अंतिम दर्शन के बाद पैतृक गांव नेमरा में अंतिम संस्कार हुआ। मुख्यमंत्री ने मां की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। वह अभी और 10 दिन नेमरा में ही रहेंगे। उन्हें तमाम रस्म-रिवाज निभाने हैं। हालांकि, 10 दिन तक राज्य का काम नहीं रुक सकता तो अधिकारी नेमरा पहुंचकर सीएम को फाइलें दिखा रहे हैं। 


 

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