रांची:
देश के कई राज्यों में लंपी वायरस (Lumpy virus) ने तबाही मचा रखी है। वहीं झारखंड में इस वायरस की एंट्री हो चुकी है। जिसे लेकर पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर है। विभाग ने लंपी वायरल को रोकने में कारगर साबित हुई गॉट पॉक्स वैक्सीन (Got Pox Vaccine) के 8,90,000 डोज खरीदा है। इसके साथ ही सभी जिलों में इसे भेज भी दिया गया है। वहीं जिला या प्रखंड पशुपालन अधिकारी को गाय एवं भैसों को देने का निर्देश भी दे दिया गया है। रांची के कांके स्थित पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान के निदेशक डॉ.बिपिन माहथा (Dr. Bipin Mahtha) ने कहा कि अब तक लंपी वायरस राज्य के 7 जिले में फैल गया है। जिसके बाद 250 जगहों से संदिग्ध पशुओं का सैंपल भोपाल में जांच के लिए भेज दिया गया है। 80 हजार पशुओं को अबतक वैक्सीनेट भी किया जा चुका है।

क्या है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है। ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन्स एंड इम्युनाइजेशन (जीएवीआई) के अनुसार, लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) कैप्रीपॉक्स वायरस के कारण होता है, जो वर्तमान में दुनियाभर के पशुधन के लिए एक उभरता हुआ खतरा है। यह वायरस अनुवांशिक रूप से पॉक्स परिवार (गोटपॉक्स और शीपपॉक्स वायरस परिवार) से संबंधित है।

क्या हैं लक्षण
लंपी वायरस से संक्रमित पशुओं के शरीर के अधिकतर भागों में मोटे-मोटे गोलाकार चकत्ते निकल आते हैं, जो गांठ यानी लंप की तरह दिखाई देते हैं। इन गांठों में बहुत खुजली होती है। नतीजा, पशु इन्हें खुजला-खुजलाकर घाव कर लेते हैं। संक्रमण से ग्रस्त पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, यानी उन्हें तेज बुखार आ जाता है। वायरस से संक्रमित होने के तुरंत बाद मवेशियों का वजन कम होने लगता है। उनकी भूख मर जाती है। इसके साथ ही, पशुओं का दूध उत्पादन कम हो जाता है और मुंह एवं ऊपरी सांस नली में घाव हो जाता है। इतना ही नहीं, संक्रमित पशुओं के पैरों में सूजन व लंगड़ापन आ जाता है, जिससे उनकी काम करने की क्षमता कम हो जाती है। संक्रमण के अन्य लक्षणों में नाक, मुंह और आंख से पानी आना शामिल है। गर्भवती गाय और भैंस का प्राय: गर्भपात भी हो जाता है और इस कारण कई पशुओं की मृत्यु तक हो जाती है। पशुओं के शरीर पर निकलने वाले चकत्तों में बैक्टीरिया का संक्रमण बढ़ जाता है।