झारखंड
झारखंड मंत्रिमंडल में बुधवार की बैठक में चार जिला धनबाद, जामताड़ा, गिरिडीह और खूंटी के सदर अस्पतालों को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में उन्नत करने की मंजूरी दी है। साथ ही विदेशों से मेडिकल ग्रेजुएट की पढ़ाई (FMG) करने वाले छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नीशप के दौरान स्टाईपंड की भी मंजूरी दी गयी। अब FMG इंटर्न को 17500 रूपए स्टाईपंड मिलेंगे। हाल ही में 15 अप्रैल, 2026 मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।
झारखंड के निवासियों को इलाज करने के लिए वेल्लोर ये दिल्ली जैसे शहरों में निर्भर नहीं रहना पड़ेगा
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों की कमी के कारण डॉक्टरों की भारी कमी है, जिसे दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर डॉक्टर तैयार करना जरूरी है। नए मेडिकल कॉलेज खुलने से युवाओं को शिक्षा, रोजगार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, तथा मरीजों को बाहर जाने की जरूरत कम होगी। ताकि झारखंड के निवासियों को इलाज करने के लिए वेल्लोर ये दिल्ली जैसे शहरों में निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
धनबाद मेडिकल कॉलेज वीजीएफ उपयोजना-1 के तहत बनेगा
चार जिलों में मेडिकल कॉलेज का राज्य सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर बीते अक्टूबर में केंद्र सरकार ने सहमति दी थी। चारों जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना पीपीपी (सार्वजनिक निजी सहभागिता) मोड में की जाएगी। यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से पीपीपी मोड में लागू होगी। धनबाद मेडिकल कॉलेज वीजीएफ उपयोजना-1 के तहत बनेगा, जबकि खूंटी, जामताड़ा और गिरिडीह के कॉलेज उपयोजना-2 के तहत स्थापित होंगे। उपयोजना-2 में केंद्र सरकार 40% पूंजीगत और 25% संचालन व्यय देगी, जबकि राज्य सरकार भी पूंजीगत व संचालन खर्च में योगदान करेगी। उपयोजना-1 में केंद्र और राज्य दोनों 30-30% पूंजीगत सहायता देंगे। 
कॉलेजों में प्रति संस्थान 100 से 150 एमबीबीएस सीटें में बढ़ोतरी
मेडिकल कॉलेजों के लिए 300 से अधिक बेड वाले अस्पताल, आधुनिक लैब, आयसीयू, इमेरजेंसी सेवाएं और अनुभवी फैकल्टी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जो कि National Medical Commission के मानकों के अनुरूप होंगी। इन कॉलेजों में प्रति संस्थान 100 से 150 एमबीबीएस सीटें संभावित हैं। दाखिला राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा NEET UG के माध्यम से होगा, जिसमें 85 प्रतिशत सीटें राज्य कोटा और 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा के तहत भरी जाएंगी। सरकार की कोशिश रहेगी कि फीस संरचना संतुलित रहे, ताकि छात्रों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े। इन परियोजनाओं का सबसे अधिक लाभ उन जिलों को मिलेगा जहां स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी सीमित हैं। खूंटी जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों और जामताड़ा-गिरिडीह जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े इलाकों में बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, वहीं धनबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्र में विशेष चिकित्सा सेवाएं मजबूत होंगी। सरकार के अनुसार, सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण और संचालन में लगभग तीन से पांच वर्ष का समय लग सकता है। सफल क्रियान्वयन की स्थिति में यह पहल झारखंड को मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है।