द फॉलोअप डेस्क
गोड्डा स्थित अडाणी पावर प्लांट के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव के बोल क्या एक दूसरे के विरोधी हैं। क्या वे आपस में टकराने लगे हैं। अडाणी पावर प्लांट के सामने भूख हड़ताल पर बैठे रैयतों के मुद्दे पर कुछ इसी तरह के संकेत, दोनों नेताओं के बयान से निकलते हैं। अडाणी पावर प्लांट से विस्थापित हुए रैयतों की मांगों को लेकर सरकार के भीतर से राजनीति के गंध निकलते दिखायी पड़ रहे हैं। यहां मालूम हो कि पिछले दिनों गौतम अडाणी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात के बाद, झारखंड की राजनीति में अडाणी फिर से चर्चा के विषय हैं।
प्रदीप यादव ने भूख हड़ताल पर बैठे रैयतों के बीच जाकर उन्हें पूरा समर्थन देने की बात कही है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि उनके मुद्दे को वह अंजाम तक पहुंचाएंगे। आप आगे आएं, हम आपका अंतिम दम तक साथ देंगे। उन्होंने रैयतों की मांगों को जायज ठहराते हुए, कई और भी उकसावे वाली बातें कही। लेकिन उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव के बयान और बोल कुछ और संदेश देते हैं। संजय प्रसाद यादव ने पहले तो रैयतों की जायज मांगों का समर्थन किया। उनसे कहा कि आपही के कारण विधायक और मंत्री बनने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसलिए वे उन्हें अवश्य न्याय दिलायेंगे। लेकिन उद्योग मंत्री का यह कहना कि रैयत उन पर भरोसा रखें। जो लोग इसकी आड़ में राजनीति करता है, यह आपको पता है। आपको आगे बढ़ा कर वह ब्लैकमेलिंग और सौदेबाजी करेगा। ऐसा होते रहा है। इसलिए ऐसे लोगों से सचेत रहें। संजय प्रसाद यादव का यह बयान किसकी ओर इशारा करता है, समझा जा सकता है।