द फॉलोअप डेस्क
नेता प्रतिपक्ष मामले को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इशारे पर ही विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले को लटकाए रखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा ने विधायक दल का नेता चयन कर विधानसभा सचिवालय को विधिसम्मत सूचना दी है। जहां तक जेवीएम का भाजपा में विलय का सवाल है तो चुनाव आयोग ने अपने निर्णय में सारी स्थित स्पष्ट कर दी है। चुनाव आयोग ने विलय को मान्यता देते हुए दो बार उन्हें राज्यसभा चुनाव में भाजपा विधायक के रूप में वोट देने का अधिकार दिया है। इसके बावजूद भाजपा नेता विधायक दल को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं देना एक राजनीतिक साजिश है।

…तो राज्य सरकार की नाकामियां होंगी उजागर
बाबूलाल ने कहा कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि नेता प्रतिपक्ष की अनुशंसा से लोकायुक्त व सूचना आयुक्त का चयन हो। क्योंकि, फिर राज्य सरकार की नाकामियां उजागर होंगी। लोकायुक्त के माध्यम से भ्रष्टाचार की जांच हो सकेगी। उन्होंने कहा कि भले ही राज्य सरकार तिकड़म से महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों को भरने से रोक दें, लेकिन देश में कार्य कर रही अन्य संवैधानिक एजेंसियों की जांच से नहीं बच सकती। राज्य सरकार पर जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता ही जा रहा।

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