द फॉलोअप डेस्कः
स्वामी विवेकानंद अनाथ सुरक्षा आश्रम के तत्वाधान में चल रहे कार्यक्रम "एक पहल" के तहत सुंदरपहाड़ी प्रखंड के कटलडीह एवं बड़ा पाखतरी इलाके के बेसहारा, अनाथ व वैसे बच्चे जो शिक्षा से नहीं जुड़ पाए हैं, उन बच्चों को अनाथ आश्रम की संचालिका बंदना दुबे शिक्षा से जोड़ रही हैं। साथ ही बच्चों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है कि कैसे वह अपने भविष्य को पढ़ाई के माध्यम से संवार सकते हैं । बच्चों को यह भी शिक्षा दी जा रही है कि बाल विवाह एवं बाल मजदूरी कानूनन अपराध है। इससे कैसे बचना है। साथ ही इसके लिए लोगों को भी जागरूक करना है। बता दें कि बंदना दुबे "एक पहल" कार्यक्रम कर रही हैं जिससे तकरीबन 100 से अधिक आदिवासी पहाड़िया बच्चे जुड़े हैं। बड़ा पाखतरी और कटहल डीह जैसे जगहों पर बंदना दुबे ने निःशुल्क शिक्षा के लिए स्कूल खोला है।

बच्चों को शहर की सैर करवाती हैं बंदना
बंदना इन बच्चों को बीच- बीच मे शहर की सैर करवाने भी ले जाती हैं। कभी रेल यात्रा, तो कभी पार्क, कभी मॉल जैसे जगहों पर घुमाकर उन बच्चों को शहर के बारे में भी बताती हैं। इसी कड़ी में उन सारे बच्चे-बच्चियों को प्रशिक्षण और प्रोत्साहित करने के लिए गोड्डा के पाण्डु बथान स्थित कालीपीठ के प्रांगण में सेवा धर्म सर्वोपरि के रूप में एक पहल कार्यक्रम किया गया। जहां तीन दिनों तक सभी बच्चों को प्रशिक्षण दिया गया। सभी का टेस्ट लिया गया जिसमें अव्वल आये बच्चों को पारितोषिक दिया गया। साथ ही आगे और बेहतर करने की शुभकामनाएं दी गई। 100 बच्चों के बीच बंदना दुबे ने गुड इंग्लिश , कॉपी कलम एवं बैग का वितरण किया। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में गोड्डा एसपी नाथू सिंह मीणा के साथ-साथ गोड्डा पुलिस प्रशासन का विशेष सहयोग रहा।

निःशुल्क शिक्षा देती रहेंगी बंदना
कार्यक्रम के अंतिम दिन गोड्डा वन पदाधिकारी मौन प्रकाश पहुंचे और उन्होंने बच्चों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि तुम सभी यह नहीं देखो की पढ़ाई कब शुरू कर रहे हैं । बस कठिन मेहनत करते रहो। मेहनत एक दिन जरुर रंग लाएगी । उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का भी उदाहरण दिया कि वो भी काफी गरीब थे लेकिन मेहनत करके देश के प्रथम नागरिक तक का सफर तय किया। कार्यक्रम में बंदना दुबे ने कहा कि ऐसे बच्चे जो मुख्यधारा की शिक्षा में अबतक नही जुड़ सके हैं। उन बच्चों को स्कूलों से जोड़कर निःशुल्क शिक्षा देती रहूंगी क्योंकि जो पढ़ा है वो आगे बढ़ा है । मैं ऐसे बच्चों के प्रति हमेशा समर्पित रहूंगी । तीन दिवसीय कार्यक्रम के आखिरी दिन अधिवक्ता रिणा डे एवं चंद्रकला के साथ-साथ कई लोग उपस्थित थे ।

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