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JSSC पेपर लीक में CBI जांच से कम कुछ भी मंजूर नहीं, भाजयुमो की राज्यपाल से मांग

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द फॉलोअप डेस्क, रांची:

भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष शशांक राज के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच को लेकर राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। शंशांक राज ने कहा कि पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। शशांक राज ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एसआईटी जांच के नाम पर पूरे मामले की लीपापोती करना चाहती है। हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। राज्यपाल के नाम सौंपे गये ज्ञापन में भाजयुमो ने बिंदुवार जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में विलंब और गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है। राज्यपाल के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा है कि राज्य सरकार बीते 4 साल में जेएसएसी सीजीएल की परीक्षा का सफल संचालन नहीं करा सकी। जब 28 जनवरी को परीक्षा हुई तो पेपर लीक का मामला उजागर हुआ और महज 4 घंटे में आयोग को परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

आयोग ने पांच बार परीक्षा स्थगित कर दी
कहा है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में ही झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग के मातहत 2025 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। वर्ष 2020-2024 के दौरान 3 बार अभ्यर्थियों से आवेदन लिया गया। 5 बार परीक्षा का तारीखें घोषित हुई। सबसे पहले अप्रैल-मई 2021 में परीक्षा की संभावित तारीख निर्धारित की गई। यह स्थगित हो गया तो 21 अगस्त 2022 को परीक्षा की तारीख निर्धारित की गई। यह परीक्षा भी अपरिहार्य कारणों से रद्द कर दी गई। मई 2023 में परीक्षा होनी थी लेकिन यह भी स्थगित हो गई। अगस्त 2023 में पुन: परीक्षा की तारीख घोषित हुई लेकिन इसे भी स्थगित किया गया। 16-17 दिसंबर 2023 को निर्धारित परीक्षा भी अपरिहार्य कारणों का हवाला देकर इसे स्थगित किया गया। 

 

आयोग-सरकार का ढुलमुल रवैया नुकसानदेह
भाजयुमो ने आरोप लगाया है कि सरकार और आयोग के ढुलमुल रवैये से राज्य के युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। आयोग के समक्ष 15 दिसंबर 2023 को विरोध प्रदर्शन किया गया था। छात्रों का आक्रोश देख आयोग ने 28 जनवरी और 4 फरवरी को परीक्षा की तारीख निर्धारित की। 28 जनवरी को परीक्षा हुई लेकिन चंद घंटे बाद ही पेपर लीक का मामला उजागर हो गया। परीक्षा रद्द कर दी गई। 4 फरवरी वाली परीक्षा स्थगित हो गई। छात्रों का भविष्य फिर अंधकारमय है। भाजयुमो ने आरोप लगाया है कि जिस एजेंसी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी आयोग ने दी थी वह बिहार में बैन है। बावजूद इसके ऐसा कदम उठाया गया। जवाबदेही कौन लेगा? उन्होंने कहा कि एजेंसी की भूमिका संदेह के घेरे में है। एसआईटी जांच के बीच आयोग के चेयरमैन का इस्तीफा भी संदेह उत्पन्न करता है। मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।