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बकोरिया कांड की सीबीआई ने कोर्ट को सौंपी क्लोजर रिपोर्ट,  मृतक के परिजन असंतुष्ट, कहा- जारी रहेगी न्यायिक लड़ाई

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द फॉलोअप डेस्क
पलामू जिले के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में 8 जून 2015 को हुए बहुचर्चित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ मामले की सीबीआई करीब 4 साल से जांच कर रही है। इस मामले में सीबीआई ने रांची के सीबीआई कोर्ट में अपनी क्लोजर रिपोर्ट सौंप दी है। सत्रों की मानें तो बकोरिया पुलिस-नक्सली मुठभेड़ मामले में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में फोरेंसिक जांच का हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है। रिपोर्ट में मुठभेड़ को सही बताया गया है। इधर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुठभेड़ में मारे हुए उदय यादव के पिता जवाहर यादव ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मेरे पुत्र, भतीजा एवं अन्य निर्दोष व्यक्तियों तथा बच्चों की जेजेएमपी के माध्यम से हत्या कराकर उसे फर्जी तरीके से मुठभेड़ दिखाए जाने के मामले की जांच सीबीआई द्वारा सही तरीके से नहीं की गई। हम लोग न्यायिक लड़ाई जारी रखेंगे सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले को लेकर जाएंगे।

वर्ष 2018 में सीबीआई ने दर्ज की थी प्राथमिकी
बकोरिया मुठभेड़ मामले में
22 अक्टूबर 2018 को झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के पर सीबीआई दिल्ली ने प्राथमिकी दर्ज की थी। इस घटना में पुलिस ने 12 लोगों को मुठभेड़ में मारने का दावा किया था मृतकों के परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हाइकोर्ट में सीआईडी की जांच पर सवाल उठाया था। सीबीआई जांच की मांग की थी। परिजनों का आरोप है कि जिन 12 लोगों को पुलिस ने मुठभेड़ में मारते हुए माओवादी बताकर अपनी पीठ थपथपाई थी। उसमें डॉ. आरके उर्फ अनुराग के अलावा किसी का कोई नक्सल रिकॉर्ड नहीं थाइस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास और डीजीपी डीके पांडेय पर फर्जी एनकाउंटर कराने के आरोप लगने लगे थे।

तत्कालीन डीजीपी ने बांटी थी इनाम की राशि
बकोरिया में हुए  मुठभेड़ घटना के दूसरे दिन नौ जून 2015 की सुबह तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय, तत्कालीन एडीजी अभियान एसएन प्रधान, स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता समेत अन्य सीनियर पुलिस अफसर हेलीकॉप्टर से बकोरिया पहुंचे थे। जवानों के बीच नकद इनाम भी बांटे गए थे।

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