द फॉलोअप डेस्क
संघर्ष, मेहनत और हौसले की मिसाल पेश करती एक अनोखी और प्रेरणादायक कहानी हजारीबाग जिले से सामने आई है। यह कहानी है चंदन कुमार की, जिसने साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सपनों को पंख जरूर मिलते हैं। आर्थिक तंगी से जूझते हुए, पंचर की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले पिता के संघर्ष और मां के त्याग ने आज उनके बेटे को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया है। हजारीबाग निवासी चंदन कुमार को 10 जनवरी से 12 जनवरी तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले मंडपम प्रोग्राम में शामिल होने का सुनहरा अवसर मिला है।
इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित युवा ‘विकसित भारत’ के विजन को लेकर अपने प्रोजेक्ट और प्रेजेंटेशन प्रस्तुत करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 विकसित भारत मिशन को साकार करने की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसमें चंदन कुमार भी अपनी सोच और नवाचार के साथ देश के भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। गौर करने वाली बात यह है कि चंदन कुमार का परिवार पहले भी इस मंच से जुड़ चुका है। बीते वर्ष उनकी बहन ने भी मंडपम प्रोग्राम में हिस्सा लिया था और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें जिला स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ था। अब इस वर्ष बेटे को मिले इस अवसर ने पूरे परिवार के साथ-साथ हजारीबाग जिले को भी गर्व से भर दिया है।

इस उपलब्धि के मौके पर चंदन कुमार के पिता भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद हजारीबाग से पढ़ाई की, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कम उम्र में ही मेहनत-मजदूरी शुरू करनी पड़ी। आज भी वे अपनी पंचर की दुकान चलाते हैं, और उसी ईमानदार मेहनत की बदौलत उन्होंने अपने बच्चों को इस काबिल बनाया कि वे देश के विकास से जुड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकें। पिता का संघर्ष, मां का त्याग, बहन का मार्गदर्शन और चंदन की अथक मेहनत यह कहानी सिर्फ एक सफलता की नहीं, बल्कि परिवार के समर्पण और संस्कारों की जीत की कहानी है। चंदन कुमार की यह सफलता आज उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा समझ बैठते हैं। यह कहानी संदेश देती है कि अगर सोच बड़ी हो और मेहनत सच्ची हो, तो छोटे से शहर से निकलकर भी देश के बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है।
