द फॉलोअप डेस्कः
अब जेटेट हर साल आयोजित करना अनिवार्य नहीं होगा। झारखंड अधिविद्य परिषद इसे नियमानुसार आयोजित करेगी। नियमित परीक्षा आयोजित नहीं होने पर इस परीक्षा में सम्मिलित होनेवाले अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। पूर्व की नियमावली में प्रावधान था कि परीक्षा आयोजित करनेवाला प्राधिकार (जैक) वर्ष में कम से कम एक बार यह परीक्षा अनिवार्य रूप से आयोजित करेगा। अब इसमें संशोधन कर प्रावधान किया गया है कि प्राधिकार नियमानुसार परीक्षा आयोजित करने के लिए उत्तरदायी होगा।

इस परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष रखी गई है, जबकि कार्मिक विभाग द्वारा विभिन्न नियुक्ति के लिए तय आयु सीमा लागू होगी। हालांकि, नियमावली में संशोधन कर यह प्रावधान किया गया है कि पिछली पात्रता परीक्षा एवं आगामी पात्रता परीक्षा के अंतराल अवधि में एक वर्ष को छोड़कर अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। झारखंड में पिछली पात्रता परीक्षा वर्ष 2016 में आयोजित की गई थी। इस तरह, वर्ष 2024 में अगली परीक्षा होती है तो अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में सात वर्ष की छूट प्रदान की जाएगी।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा 15 जून को अधिसूचित संशोधित नियमावली में इस परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए आवश्यक अर्हता में भी कई संशोधन किए गए हैं। इसके तहत अभियंत्रण, प्रौद्योगिकी, कृषि तथा गणित में किसी एक में तीन वर्षीय स्नातक के साथ-साथ गणित, भौतिकी रसायनशास्त्र, वनस्पति विज्ञान एवं जीव विज्ञान में कम से कम दो विषय के साथ 12वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी भी गणित एवं विज्ञान विषय के लिए इस परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे।

इसी तरह, कला, मानविकी, समाज विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन में किसी एक में तीन वर्षीय स्नातक उत्तीर्ण अभ्यर्थी भी समाज विज्ञान विषय के लिए परीक्षा में सम्मिलित हो सकेंगे, बशर्ते व इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, लेखाशास्त्र, व्यापार अध्ययन में से किसी दो विषयों के साथ स्नातक उत्तीर्ण हो।

अब दोनों श्रेणी कक्षा एक से पांच तथा कक्षा छह से आठ के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा ढाई घंटे की होगी। पूर्व की नियमावली के अनुसार, कक्षा एक से पांच के लिए यह परीक्षा ढाई घंटे तथा कक्षा छह से आठ के लिए यह तीन घंटे की होनी थी। झारखंड में अब शिक्षक पात्रता परीक्षा 150 अंकों की होगी। दोनों श्रेणी की परीक्षा में 150 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनका पूर्णांक भी इतना ही होगा। इससे पूर्व कक्षा एक से पांच की परीक्षा में 200 तथा तथा छह से आठ में 250 अंकों की परीक्षा का प्रावधान था।