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रांची में महाशिवरात्रि जुलूस को लेकर यातायात व्यवस्था में  किए गए  बदलाव, 5 से 10 बजे तक बड़े वाहनों की नो एंट्री

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द फॉलोअप डेस्क

रांची में आज यानी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। राज्य में जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाया गया है। वहीं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन भी अलर्ट है, ताकि किसी को भी परेशानियों का सामना न करना पड़े। बताते चलें कि आज शाम को लगभग 4 से 5 बजे तक शिव बारात निकलेगी। जानकारी के मुताबिक शिव बारात जुलूस के कारण राज्य में यातायात व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक बड़े वाहनों का शहर में प्रवेश वर्जित रहेगा। वहीं, छोटे वाहन विभिन्न मार्गों पर चलेंगे। लेकिन जुलूस के दौरान कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। बताते चलें कि ट्रैफिक SP ने नागरिकों से जुलूस वाले मार्गों से बचने और सुगम यातायात में सहयोग करने का अनुरोध किया है। शहर में आने वाले बड़े मालवाहक वाहन निर्धारित स्थानों तक ही जा सकेंगे।

बताते चलें कि कांके की ओर जाने वाले छोटे वाहन राम मंदिर मोड़, हॉटलिप्स चौक और न्यू मार्केट चौक से अपने गंतव्य स्थान तक जा सकेंगे। वहीं, शिव बारात जुलूस के समय शनि मंदिर, दुर्गा मंदिर, मिनाक्षी गली, सुखदेवनगर, बालाजी मंदिर, सुलभ शौचालय और गौशाला कटिंग से पहाड़ी मंदिर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की जाएगी। जानकारी के अनुसार, जुलूस का मार्ग इंद्रपुरी शिव मंदिर से शुरू होकर रातु रोड, मेट्रोगली, रानी सती मंदिर, पहाड़ी मंदिर, बानो मंजिल मार्ग, गाड़ीखाना, कार्ट सराय रोड, जेजे रोड, शहीद चौक, पुस्तक पथ, ज्योति संगम, गांधी चौक, मारवाड़ी टोला, महावीर चौक, प्यादा टोली और आर आर स्पोटिंग दुर्गा पुजा समिति के प्रांगण में समाप्त होगा। ट्रैफिक एसपी ने आम नागरिकों से अनुरोध किया है कि जुलूस वाले रूट का कम से कम प्रयोग करें और सुगम यातायात में सहयोग करें।

क्यों मनाया जाता है महाशिवरात्री, आइए जानते हैं-  देशभर में आस्था और श्रद्धा के साथ महाशिवरात्रि का पर्व प्रतिवर्ष मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए समुद्र मंथन से निकला विष पिया था, जिससे उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। इसलिए इस रात को शिवभक्त व्रत रखकर और रात्रि जागरण कर भगवान शिव की आराधना करते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित की जाती है। वहीं, श्रद्धालु “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि को आत्मसंयम, तपस्या और ध्यान का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। झारखंड सहित देश के प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

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