द फॉलोअप डेस्क
चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड स्थित मां भद्रकाली मंदिर परिसर में स्थापित सहस्त्र शिवलिंग सावन के पावन महीने में शिवभक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह धार्मिक स्थल अपनी खास विशेषताओं के कारण देशभर में प्रसिद्ध है, जहां एक साथ 1008 शिवलिंगों का जलाभिषेक होता है।
पहले यह जगह नक्सलियों के प्रभाव में सिमटी हुई थी, लेकिन झारखंड प्रशासन की सुखद पहल से यह इलाका भय मुक्त हुआ है एक समय को दिन में भी आने से डरते थे लेकिन आज के समय में यहां पर 24 घंटे किसी दिन भी श्रद्धालु आते नहीं थकते। सावन महीने में देवघर जाने से पहले और लौटने के बाद कांवड़िये सहस्त्र शिवलिंग पर जल चढ़ाना नहीं भूलते। यही कारण है कि सावन महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। करीब चार फीट ऊंचे इस शिवलिंग में कुल 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग एक ही पत्थर पर उकेरे गए हैं। विशेष बात यह है कि जलाभिषेक के दौरान जब कोई भक्त इसमें जल अर्पित करता है, तो वह जल अपने आप सभी शिवलिंगों पर एक साथ प्रवाहित हो जाता है।
पुरातत्वविदों के अनुसार, यह शिवलिंग गुप्तकालीन है और उस दौर में इस क्षेत्र में शिवभक्ति की विशेष परंपरा रही होगी। आज भी इस परंपरा को हजारों श्रद्धालु जीवंत बनाए हुए हैं। इस मंदिर के पुजारी वह आचार्य बताते हैं कि यह शिवलिंग सतयुग का बना हुआ है जो करीब नौवीं सदी में बना है और यह स्वयं शंभू है जिसे बाबा विश्वकर्मा ने अपने हाथों से बनाया था। पिछले कई दशक से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु जो बाबा धाम देवघर जाते हैं वो यहां पहुंचते हैं और बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। सावन के हर सोमवार को यहां का दृश्य किसी मेले से कम नहीं होता।
