द फॉलोअप डेस्क
अतिवृष्टि को लेकर सीएम ने दिए डीसी व अधिकारियों को निर्देश
आज बिजली की आंख-मिचौनी राज्य सरकार के मुख्य सचिवालय प्रोजेक्ट भवन में भी दिखी। इसका अनुभव खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी किया। दरअसल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कैबिनेट की बैठक कर रहे थे। उसी समय प्रोजेक्ट भवन की बिजली गुल हो गयी। लेकिन बैठक के दौरान प्रोजेक्ट भवन की बिजली गुल हो गयी। लगभग पांच मिनट तक प्रोजेक्ट भवन में अंधेरा छाया रहा। यह स्थिति तब बनी जब प्रोजेक्ट भवन में दो फीडरों से बिजली की आपूर्ति की जाती है। एक फीडर से बिजली आपूर्ति में व्यवधान आने पर दूसरे फीडर से बिजली की आपूर्ति करने का वैकल्पिक रास्ता हो। इसके अलावा प्रोजेक्ट भवन में जेनरेटर की भी व्यवस्था है। लेकिन तकनीकी गड़बड़ी की वजह से बिजली गुल हो गयी, जेनरेटर भी कुछ देर के लिए जवाब दे गया। हालांकि बिजली विभाग से जुड़े अधिकारियों ने कुछ ही देर में तकनीकी गड़बड़ी पर काबू पा लिया। पत्रकारों ने जब बिजली की स्थिति के बारे में पूछा तो सीएम ने खुद बताया कि आज कैबिनेट की बैठक के दौरान ही बिजली गुल हो गयी। उन्होंने इसके लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया है। अर्थात मुख्यमंत्री बिजली की समस्या को गंभीरता से लिया है।

अति वृष्टि को लेकर मुख्यमंत्री ने दिए अधिकारियों को निर्देश
इससे पूर्व मुख्यमंत्री अति वृष्टि से हुए नुकसान और परेशानी के मुद्दे पर जिलों के डीसी व वरीय अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। इस बैठक में मुख्यमंत्री अधिकारियों को पूर्ण रूप से अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के उपायुक्तों से कहा है कि शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल जमाव की समस्या से आम जनमानस को निजात दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। जल जमाव की स्थिति को जल्द से जल्द खत्म करने का प्रयास करें। जिलों में इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, पुल-पुलिया, घर, फसल इत्यादि को हुए नुकसान का आकलन कर राज्य सरकार को तत्काल रिपोर्ट भेजें। अतिवृष्टि को देखते हुए वॉटरफॉल, बराज इत्यादि पर्यटन स्थलों में किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए NDRF की टीम के साथ-साथ स्थानीय लोगों का भी सहयोग लें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वॉटरफॉल में आवश्यकता के अनुरूप सुरक्षा कर्मी भी तैनात रखें।
