द फॉलोअप डेस्क
संसद में 20 अगस्त को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया गया। इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में रखा। जैसे ही विधेयक पेश किया गया, विपक्षी दलों ने इस पर जोरदार हंगामा किया। भारी विरोध के चलते यह विधेयक फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है।
इस बीच चुनाव सुधार से जुड़ी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने एक ताजा रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल 30 मुख्यमंत्रियों में से 12 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 10 मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आरोप हैं, जिनमें हत्या की कोशिश, अपहरण, रिश्वतखोरी और आपराधिक धमकी शामिल हैं। ADR ने यह रिपोर्ट मुख्यमंत्रियों द्वारा पिछले विधानसभा चुनाव के समय दाखिल किए गए स्व-शपथ पत्रों के आधार पर तैयार की है।

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक मामले तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ दर्ज हैं, जिनकी संख्या 89 है। इसके बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के खिलाफ 47 मामले, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर 19, कर्नाटक के सिद्धारमैया पर 13, और झारखंड के हेमंत सोरेन के खिलाफ 5 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर 4-4 मामले, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर 2 मामले, और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ 1 मामला दर्ज है।
इस विधेयक में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी पाए जाने या गिरफ्तारी की स्थिति में पद से हटाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि कोई मंत्री ऐसे अपराध में गिरफ्तार होता है जिसकी सजा पांच वर्ष या उससे अधिक है, और वह 30 दिन तक जेल में रहता है, तो उसे पद से हटा दिया जाएगा। विधेयक के मुताबिक, यदि ऐसे मंत्री को 30वें दिन तक मुख्यमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया गया, तो 31वें दिन से वह स्वतः मंत्री पद से हटा हुआ माना जाएगा। हालांकि, सैद्धांतिक रूप से यह संभव होगा कि जेल से बाहर आने के बाद संबंधित व्यक्ति को पुनः मंत्री पद सौंपा जा सकेगा।
