द फॉलोअप डेस्क
झारखंड नगर निगम परिषद् में 74वां संसोधन लागू करने के लिए रांची के उप महापौर संजीव विजयवर्गीय ने राष्ट्रपति दौप्रदी मुर्मू से मुलाकात की। उन्होंने राष्ट्रपति को राज्य सरकार द्वारा नगर निकायों को किस तरह दबाया जा रहा है इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कहा कि पिछले दो सालों से झारखंड के 13 नगर निकायों का चुनाव लंबित है। झारखंड की राजधानी रांची सहित 33 नगर निकायों का कार्यकाल अप्रैल महीने में पूरा हो रहा है। लेकिन सरकार की चुनाव कराने की मंशा नहीं है। नगर निकाय चुनाव कराने की इसके फलस्वरूप अप्रैल माह के बाद झारखंड के सभी 46 नगर निकायों का चुनाव लंबित हो जाएगा। जिससे सभी 46 नगर निकायों के क्षेत्र में निवास करने वाले जनमानस को अपने कार्यों को कराने के लिए नगर निकाय के पदाधिकारियों के पास दौड़ना होगा।

जन प्रतिनिधि ठगा महसूस कर रहे
नगर निगम में जन प्रतिनिधियों की स्थिति सुदृढ़ नहीं है। नगर निगमों में अफसरशाही हावी है। नगर निकाय एक स्वतः संस्था होती है। परंतु राज्य सरकार का नियंत्रण इतना ज्यादा हैं कि नगर निगम परिषद् की मासिक बैठक में लिए गए निर्णयों को लागू कराना नगर निगम परिषद् के सदस्यों के लिए संभवन नहीं हो पाता है। राज्य सरकार जैसे चाहें नगर निकायों पर अपना हस्ताक्षेप कर नगर निकायों की स्वतंत्रता को समाप्त करती है। इसके कारण नगर निकायों में अफसरशाही जरूरत ज्यादा हावी रहता है। इसका असर साफ तौर पर नगर निकाय के अंतर्गत आने वाले आम जन मानस पर पड़ता है। नगर निकाय चुनाव जीत कर जनता के बीच से आए जन प्रतिनिधि भी अपने आप को ठगा हुआ महसूस करते है। आज की हालात यह हैं कि नगर निकाय को यह भी अधिकार नहीं है कि अपने निकाय की आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकें। किसी कर्मचारी का तबादला कर सकें। ऐसी कई समस्या है जिससे राज्य के सभी नगर निकाय जूझ रहें है।
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