द फॉलोअप डेस्क:
बोकारो में 18 साल की पुष्पा कुमारी महतो के कत्ल का आरोपी दिनेश कुमार महतो कई लड़कियों के संपर्क में था। वह, पुष्पा के अलावा और भी कई लड़कियों से बातें करता था। दिनेश महतो के पास पुलिस को 23 सिमकार्ड और 4 मोबाइल फोन मिले हैं। इतना ही नहीं, हत्यारोपी दिनेश बीपीएन नंबर वाले इंटरनेट कॉलिंग का भी इस्तेमाल किया करता था। यह इंटरनेट कॉलिंग ही वह कड़ी थी जिसने पुलिस को दिनेश की गिरेबान तक पहुंचा दिया। बोकारो पुलिस की जांच में पुष्पा हत्याकांड को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
जांच के दौरान यह शर्मनाक तथ्य भी उजागर हुआ है कि पेंड्राजोरा थाना प्रभारी और पुष्पा गुमशुदगी केस के आईओ यानी जांच अधिकारी, इस केस के मुख्य आरोपी दिनेश के साथ पार्टी किया करते थे। विश्वस्त सूत्रों से पुलिस पदाधिकारियों द्वारा दिनेश कुमार महतो से पैसे लेने की बात भी सामने आई है।
कहा यह जा रहा है कि, थाना प्रभारी और जांच अधिकारी ने हत्यारोपी को यह यकीन दिला दिया था कि वह इस केस में आसानी से बचकर निकल जाएगा।

नई एसआईटी ने 4 दिन में सुलझाया केस
पेंड्राजोरा पुलिस ने पुष्पा की गुमशुदगी केस की जांच को जितना टाल जा सकता था, उतना टालने की कोशिश की। यह बात इसी से स्पष्ट है कि जिस केस को सुलझाने में थाना प्रभारी और जांच अधिकारी अनिकेत कुमार को 8 महीने लग गए, उसे स्पेशल एसआईटी ने महज 4 दिन में सुलझा लिया। सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में बनाई गई एसआईटी ने यह खुलासा किया है।
टेक्निकल सर्विलांस के जरिये हुआ खुलासा
जांच में यह सामने आया है कि पुलिस टेक्निकल सर्विलांस के जरिए ही आरोपी दिनेश तक पहुंची। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में बनी एसआईटी ने जब छानबीन शुरू की तो पता चला कि 21 जुलाई को मृतका पुष्पा और हत्यारोपी दिनेश कुमार महतो का मोबाइल लोकेशन पहले गांव, फिर कॉलेज और इसके बाद बाजार में एक ही जगह पर था, जिसका मतलब यह हुआ कि वे साथ थे।
बाजार में ही दोनों का आखिरी मोबाइल लोकेशन मिला था, और फिर फोन बंद हो गया। इसके बाद पुलिस ने 21 अप्रैल से पहले और बाद दिनेश महतो की गतिविधियों को बारीकी से खंगाला तो पता चला कि पुष्पा की गुमशुदगी के बाद दिनेश लगातार बीपीएन नंबर वाले इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल किया करता था, संभवत इसमें लोकेशन ट्रेस नहीं किया जा सकता। इसी बात पर पुलिस को शक हुआ और जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने सारा राज उगल दिया।

पेंड्रोजोरा थाना प्रभारी और आईओ की मटन पार्टी
बोकारो एसपी कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी में साफ लिखा है कि पुष्पा गुमशुदगी केस को लेकर बनी प्रारंभिक एसआईटी को वरीय पदाधिकारियों द्वारा जो भी निर्देश दिया जा रहा था, उसका अनुपालन नहीं किया गया। अभियुक्त को फायदा पहुंचाने के मकसद से पीड़ित पक्ष को कमजोर किया गया। स्पष्ट रूप से जानकारी दी गई है कि अभियुक्त और पेंड्रोजोरा थाना की पुलिस के बीच पैसों का लेन-देन हुआ और पदाधिकारियों ने हत्यारोपी के साथ पार्टी की। एसपी ने कहा कि इससे आम लोगों के बीच पुलिस की काफी नकारात्मक छवि बनी। यही वजह है कि 28 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करके उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
21 जुलाई 2025 को लापता हुई थी पुष्पा कुमारी महतो
पुष्पा कुमारी महतो 18 साल की थी और 21 जुलाई 2025 को चास कॉलेज में स्नातक में दाखिला लेने गई थी। फिर वह नहीं लौटी। मां रेखा देवी ने 24 जुलाई को पेंड्रोजोरा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनका आवेदन नहीं लिया गया। 4 अगस्त को उनका आवेदन लिया गया, लेकिन आरोप है कि गंभीरता से इसकी जांच नहीं की गई। थक-हारकर रेखा देवी को हाईकोर्ट जाना पड़ा और तब डीजीपी के निर्देश पर जांच में तेजी आई। 11 जुलाई 2026 को पुष्पा का नरकंकाल चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत मधुटांड़ के जंगल से मिला।
पुलिस ने बताया कि पुष्पा और दिनेश महतो बीते 3 साल से रिलेशनशिप में थे। दोनों के बीच अक्सर फोन पर बातचीत होती थी। इस बीच घरवालों ने पुष्पा की शादी तय कर दी, लेकिन वह दिनेश महतो पर शादी का दबाव बना रही थी। इसी बात से नाराज होकर उसने पुष्पा की हत्या की साजिश रची थी और इस साजिश को अमलीजामा भी पहना दिया।