द फॉलोअप डेस्क
सिमडेगा जिला प्रशासन की दूरदर्शी पहल अब रंग ला रही है। उपायुक्त कंचन सिंह की सोच और प्रयासों की बदौलत सिमडेगा की मिट्टी में उपजे मडुआ से बने खाद्य उत्पाद आज दिल्ली के बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं। नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित सरस आजीविका मेला में जिले की महिलाएं अपने हुनर से न केवल ग्राहकों का दिल जीत रही हैं, बल्कि सिमडेगा का नाम भी रोशन कर रही हैं।
कोलेबिरा प्रखंड की महिला ब्रिजिट कंडुलना ने बताया कि सखी मंडल से जुड़कर जब उन्होंने मडुआ की खेती शुरू की थी, तब कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनके उत्पाद दिल्ली जैसे मंच पर हाथों-हाथ बिकेंगे। आज उनके बनाए मडुआ लड्डू, पापड़, चाणाचूर, तिल लड्डू, अचार और मधुरस ग्राहकों के बीच खूब पसंद किए जा रहे हैं। पहले ही दिन 15 से 16 हजार रुपये की बिक्री ने उन्हें हैरान भी किया और उत्साहित भी। अब उन्होंने मेले की अवधि में लाखों की कमाई का लक्ष्य तय कर लिया है।
जिला प्रशासन और ब्रांड पलाश के सहयोग से महिलाओं को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का सशक्त मंच मिला है। डीसी कंचन सिंह की इस पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही उन्हें ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में पहुंचा दिया है। जेएसएलपीएस अधिकारियों का कहना है कि सिमडेगा की महिलाएं बेहद मेहनती और प्रतिभाशाली हैं। उन्हें उचित मंच और बाजार उपलब्ध कराने का लगातार प्रयास हो रहा है। दिल्ली सरस मेला में मिली सफलता जिले के लिए गर्व का विषय है और यह इस बात का प्रमाण भी है कि सिमडेगा की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को छू सकती है।
