दीपक झा
जामताड़ा जिले में पहली बार वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीक के तहत बायो-फ्लॉक फिश फार्मिंग की शुरुआत कर प्रगतिशील किसान निर्मल मांझी ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पहल जामताड़ा के नाला विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मथुरा गांव में की गई है, जो अब जिलेभर के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनती जा रही है। बायो-फ्लॉक फिश फार्मिंग एक आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी तकनीक है, जिसमें कम स्थान पर स्थापित टैंकों में मछलियों का पालन किया जाता है। इस तकनीक में मछलियों के मल-मूत्र एवं बचे हुए चारे को बायो-फ्लॉक नामक सूक्ष्मजीवों का समूह प्रोटीन युक्त आहार में परिवर्तित कर देता है, जिससे पानी की गुणवत्ता बनी रहती है और बार-बार पानी बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
इस तकनीक से न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि कम क्षेत्र में अधिक संख्या में मछलियों का उत्पादन भी संभव होता है। इससे लागत कम होती है और मुनाफा अधिक मिलता है। निर्मल मांझी ने इस विधि से मछली उत्पादन कर लगभग 4 से 5 लाख रुपये का अच्छा लाभ अर्जित किया है, जो इस तकनीक की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। निर्मल मांझी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत कम स्थान में टैंक बनाकर विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन शुरू किया है। वे जामताड़ा जिले के जाने-माने प्रगतिशील किसानों में शामिल हैं और पूर्व से ही लगभग 20 एकड़ भूमि पर आम बागवानी की खेती कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वे अन्य आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर भी अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं।

निर्मल मांझी की यह अभिनव पहल सिद्ध करती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो कम पूंजी में आत्मनिर्भर बन सकते हैं। बायो-फ्लॉक तकनीक विशेष रूप से उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनके पास भूमि और जल संसाधनों की कमी है। जिले में पहली बार इस प्रकार की वैज्ञानिक पहल से यह आशा जगी है कि आने वाले समय में जामताड़ा मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा और अन्य किसान भी इससे प्रेरित होकर बायो-फ्लॉक तकनीक को अपनाएंगे।
