द फॉलोअप डेस्क
गुमला जिला, जो झारखंड का एक प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर और 80% आदिवासी बहुल क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, अब पर्यटन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। इस दिशा में वन विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन क्षेत्र में जहां बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है, वहीं पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई निर्माण कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, इस वर्ष मानसून की अच्छी बारिश का लाभ उठाते हुए जिले में वृक्षारोपण का कार्य व्यापक रूप से किया गया है। डीएफओ अहमद बिलाल अनवर ने जानकारी दी कि वन क्षेत्र का विस्तार और संरक्षण केवल विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है, इसमें आम लोगों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपील की कि यदि गुमला की खूबसूरती को बनाए रखना है और इसे पर्यटन के क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान दिलाना है, तो हर नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
डीएफओ ने बताया कि विभाग की ओर से वन क्षेत्रों में पार्कों का निर्माण किया जा रहा है तथा आकर्षक सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है, ताकि पर्यटक यहां आकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकें। उन्होंने कहा कि अगर आम लोगों का सहयोग मिलता है, तो गुमला आने वाले समय में न केवल झारखंड बल्कि देशभर में एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है।
स्थानीय स्कूली छात्राओं ने भी वन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रकृति की सुंदरता न केवल मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन भी प्रदान करते हैं। उनका मानना है कि प्रकृति और वन क्षेत्रों की रक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
डीएफओ अहमद बिलाल अनवर ने यह भी कहा कि अगर गुमला को पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित किया जाता है, तो इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं और उन्हें रोज़गार की तलाश में पलायन नहीं करना पड़ेगा। आने वाले समय में पर्यटक गुमला की इन खूबसूरत वादियों की ओर आकर्षित होंगे, जिससे जिले की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी। वन विभाग का यह प्रयास गुमला की प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने और उसे पर्यटन के क्षेत्र में पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
