द फॉलोअप डेस्क
गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल के विश्रामपुर पंचायत के बरवाही गाँव मे पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प के बाद मामला तूल पकड़ रहा है। अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के द्वारा शहर मे पीड़ित ग्रामीणों के साथ एक बैठक किया गया। वहीं बैठक के बाद महासभा की ओर से बताया गया कि ग्रामीणों पर जिस तरह से बर्बरता पूर्वक व्यवहार किया गया है, यह अबुवा सरकार की पहचान नहीं है। आखिर कैसे डीसी के रहते निहत्थे आदिवासी ग्रामीणों पर लाठीचार्ज किया गया क्या इसी दिन के लिए हमलोग ने आदिवासियों की सरकार बनाई। हमलोग मंडल डैम के विस्थापितों के पुर्नवास का विरोध नहीं कर रहे हैं, लोगों को बसाइये लेकिन कानून के तहत न की बलपूर्वक।

महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष जय प्रकाश मिंज और झारखण्ड के ज्याँ ड्रेज़ कहे जाने वाले फ्लिप कुजूर ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता कर कहा कि जिस जगह पर यह घटना घटी है, हमलोग उस जगह का भ्रमण किए हैं जहां ग्रामीण महिलाओ ने कहा की हमलोगों को बुरी तरह से पीटा गया है, वो भी बिना महिला पुलिस जवान के। हम इस घटना की घोर निंदा करते है, हम इसके लिए सभी जगहों पर जाकर शिकायत करेंगे। विधानसभा मे कोई विधायक से प्रश्न उठवाना, मानवाधिकार आयोग या फिर मुख्यमंत्री से मुलाकात कर शिकायत करना पड़े। विस्थापितों को बसाने के लिए तीन नियम बनाए गए हैं, उन नियमों का भी पालन नहीं किया जा रहा है, जबकि स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा उस जंगल को पट्टा देने के लिए वन समिति और अन्य वन विभाग के अधिकारियो के पास पत्र लिखा हुआ है ऐसे मे आप कैसे इनलोगो को बसाएंगे।
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उन्होंने कहा की बच्चों को जिस तरह से पीटा गया है, उसके बाद हमलोगों ने इसकी CWC के समक्ष पीड़ित बच्चों का ऑन रिकॉर्ड बयान दर्ज कराया है। गौरतलब है की सात मार्च को मंडल डैम के विस्थापितो को बसाने के लिए डीसी, एसपी, डीएफओ सहित जिला स्तरीय पदाधिकारी स्थल का निरीक्षण करने गए हुए थे। इस दौरान कुछ ग्रामीणों के द्वारा अधिकारियों के रास्ते को लगभग 15 मिनट तक रोके रखा था जिसके बाद पुलिस के पदाधिकारी लोगों को समझाने गए थे, लेकिन ग्रामीण नहीं माने और आक्रोषित हो गए थे। जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई थी जिसमें दर्जन से अधिक ग्रामीण महिला, पुरुष और बच्चें घायल हो गए थे तब से माहौल पूरा गर्म है।