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घाटशिला का रण तैयार, कमल लिए बाबूलाल का सोमेश करेंगे तीर धनुष से शिकार

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द फॉलोअप डेस्क
आखिरकार एक ही दिन झामुमो और भाजपा ने अपने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी। घाटशिला विधानसभा उप चुनाव में वही चेहरे आमने सामने हुए, जिसकी पिछले दो महीने से संभावना जतायी जा रही थी। बीच में स्वर्गीय रामदास सोरेन की पत्नी सूरजमणि सोरेन को भी टिकट दिए जाने पर झामुमो में गंभीरता से विचार किया गया था। लेकिन स्वास्थ्य कारणों और उम्र के एक दहलीज पर खड़ी होने के कारण झामुमो ने स्वर्गीय रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन को टिकट देना मुनासिब समझा। उधर 2024 के विधानसभा चुनाव में स्वर्गीय रामदास सोरेन के विरुद्ध चुनाव लड़नेवाले पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन पर भाजपा ने ज्यादा भरोसा किया। अब एक ही उम्मीदवार की बेसब्री से प्रतीक्षा की जा रही है। वह है, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा। मोर्चा किसको उम्मीदवार बनाता है, इस पर सबकी नजर है। उम्मीद की जा रही है कि मोर्चा अध्यक्ष जयराम महतो अगले एक-दो दिनों में पार्टी प्रत्याशी की घोषणा कर देंगे। इस चुनाव में उनके कद की भी परीक्षा होगी।

घाटशिला में होगी बाबूलाल सोरेन के साथ बाबूलाल मरांडी की भी परीक्षा
घाटशिला विधानसभा उप चुनाव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ साथ भाजपा के कद्दावर नेताओं के लिए भी अग्नि परीक्षा होगी। झामुमो में जीत-हार का सीधा श्रेय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जाएगा, वहीं भाजपा में इसका असर कई बड़े नेताओं का राजनीतिक कैरियर प्रभावित करेगा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सह प्रतिपक्ष का नेता होने के कारण घाटशिला में बाबूलाल मरांडी यश-अपयश के भागी बनेंगे। वहीं बाबूलाल सोरेन की जीत कोल्हान के टाईगर कहे जानेवाले चंपाई सोरेन को दहाड़ने के लिए फिर खड़ा कर देगा। चंपाई का भाजपा के भीतर राजनीतिक कद भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ेगा। इसके अलावा संगठन की सीधी जिम्मेदारी से दूर रहने के कारण पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और अर्जुन मुंडा को बचाव का बहाना मिलेगा।

पहली बार भाजपा ने प्रत्याशी रिपीट किया
2024 के विधानसभा चुनाव में चंपाई सोरेन को अपने पुत्र बाबूलाल सोरेन के लिए घाटशिला से टिकट का जुगाड़ करना पड़ा था। हालांकि इस चुनाव में बाबूलाल सोरेन लगभग 22 हजार मतों से स्वर्गीय रामदास सोरेन से पराजित हुए। लेकिन घाटशिला नहीं छोड़ा। अलग अंदाज में वह घाटशिला की जनता से जुड़े रहे और अपना जनसंपर्क अभियान जारी रखा। इस अभियान में उनके पिता चंपाई सोरेन भी साथ देते रहे। अब दोनों पिता-पुत्र सीधे तौर पर चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं। घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में यह पहला मौका है जब अलग राज्य बनने के बाद भाजपा ने किसी नेता को लगातार दूसरी बार प्रत्याशी बनाया है। अन्यथा 2005 से लेकर 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा हर बार अपना प्रत्याशी बदलती रही। घाटशिला से कांग्रेस की टिकट पर प्रदीप कुमार बलमुचू और झामुमो की टिकट पर रामदास सोरेन तीन-तीन बार चुनाव जीते। भाजपा को यहां एक बार 2024 में चुनाव जीतने का मौका मिला। लक्ष्मण टुडू कमल खिलाने में सफल हुए।

Tags - Ghatshila by-election BJP-JMM candidates announced Somesh and Babulal to face off