पीयूष मिश्रा/गिरिडीह
गिरिडीह शहर को रोशन करने और सोलर लाइट सिटी बनाने का दावा अब जमीन पर पूरी तरह फेल होता नजर आ रहा है। पुलिस लाइन से लेकर जोड़ा पहाड़ी तक कई इलाकों में लगी स्ट्रीट लाइटें या तो खराब पड़ी हैं या महीनों से बंद हैं, जिससे रात के समय सड़कें पूरी तरह अंधेरे में डूब जाती हैं और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे काम की जिम्मेदारी श्री कलेक्शन और श्री राम इंटरप्राइजेज को दी गई है, लेकिन कार्य की गुणवत्ता और नियमित रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

महीनों से खराब लाइटें, जमीन पर अधूरा काम
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए सोलर लाइट पोल महज छह महीने के भीतर ही खराब हो जाते हैं। इसके बाद फिर से टेंडर निकालकर उसी जगह नई लाइटें लगाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। कई स्थानों पर पिछले आठ महीनों से पोल तक नहीं लगाए गए हैं और सड़क किनारे पोल यूं ही पड़े हुए हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा सिस्टम केवल कागजों पर विकास दिखाने का जरिया बनकर रह गया है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

अंधेरे में डूबे इलाके, सुरक्षा पर भी खतरा
रात होते ही कई सड़कें पूरी तरह अंधेरे में डूब जाती हैं, जिससे दुर्घटनाओं और आपराधिक घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है और लोग इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। इस मामले में स्थानीय मुखिया ने बताया कि कई बार संबंधित एजेंसियों को जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। एजेंसी का कार्यालय रांची में होने के कारण त्वरित कार्रवाई नहीं हो पाती, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को अंधेरे में क्यों रहना पड़ रहा है, और यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सोलर लाइट सिटी का सपना केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।