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AJSU छोड़ BJP में शामिल हुए हरेलाल महतो, ईचागढ़ में नए समीकरणों की चर्चा

AJSU छोड़ BJP में शामिल हुए हरेलाल महतो, ईचागढ़ में नए समीकरणों की चर्चा

द फॉलोअप, जमशेदपुर:

Jharkhand News: ईचागढ़ की राजनीति में रविवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। आजसू (AJSU) के पूर्व केंद्रीय महासचिव और 2019 व 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी रहे हरेलाल महतो अब भाजपा (Harelal Mahato Joins BJP) के हो गये। भाजपा (BJP Jharkhand) के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू (Aditya Sahu) समेत पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से हजारों समर्थकों की मौजूदगी ने इस सियासी बदलाव को और अहम बना दिया। अब सवाल है कि हरेलाल महतो के भाजपा में आने से ईचागढ़ की राजनीति में समीकरण किस हद तक बदलेंगे। दरअसल, सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में 11 अक्टूबर को हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम की पटकथा पिछले महीने ही लिखी जाने लगी थी। 25 सितंबर को हरेलाल महतो ने आजसू पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और केंद्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके साथ ईचागढ़, कुकड़ू, नीमडीह और चांडिल प्रखंडों के आजसू अध्यक्षों ने भी पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद से ही उनके भाजपा में अगले राजनीतिक कदम को चर्चाओं का बाजार गर्म था, जिस पर रविवार को विराम लग गया। हरेलाल महतो ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर अपने नये राजनीतिक सफर की शुरुआत की।

वर्ष 2019 में पहली बार आजसू के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा

हरेलाल महतो ईचागढ़ की राजनीति में नया चेहरा नहीं हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने पहली बार आजसू के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था। वर्ष 2024 में भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें 51 हजार से अधिक वोट मिले, लेकिन जीत हासिल नहीं हो सकी। लगातार दो चुनाव लड़ने और संगठन में लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाने के कारण क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पहचान बनी रही है। अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी चुनौती अपने समर्थकों को नये संगठन से जोड़ने और पार्टी की जमीनी ताकत बढ़ाने की होगी। ऐसे में हरेलाल महतो के पार्टी में शामिल होने के मौके पर भाजपा ने केवल सदस्यता समारोह तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि झारखंड की मौजूदा राजनीति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी (Leader of the Opposition Babulal Marandi) ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, बालू और कोयले के कारोबार तथा सरकारी नौकरियों में कथित अनियमितताओं को लेकर हेमंत सोरेन सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में आम लोगों की सुरक्षा और युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार उपलब्ध कराने के मोर्चे पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने की अपील

मरांडी ने केंद्र सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। दुर्गा पूजा के दौरान दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) को पद से हटाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने धार्मिक पर्व के समय ऐसे आंदोलन को अनुचित बताया। वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने गरीबों, किसानों और जनकल्याणकारी योजनाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार पर खनिज संपदा और रोजगार से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगाए। मनरेगा को लेकर भी उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पर निशाना साधा। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा (Former Chief Minister Arjun Munda) ने झारखंड की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और राज्य गठन के उद्देश्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बेहतर शासन और विकास की जरूरत पर जोर देते हुए कपाली और डोबो जैसे क्षेत्रों के शहरीकरण तथा जमीन से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा (Former Chief Minister Madhu Koda) के राजनीतिक दौर का जिक्र हुआ, तो रोजगार, भ्रष्टाचार, खनिज संपदा, कानून-व्यवस्था और राज्य के विकास जैसे मुद्दे भी उठाए गये। भाजपा नेताओं ने राज्य में राजनीतिक बदलाव की जरूरत बताते हुए कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने की अपील की।

हरेलाल महतो की नई पारी ने सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया

भाजपा नेता दिनेशानंद गोस्वामी (Dineshanand Goswami) ने रोजगार, विकास और जनहित के मुद्दों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। वहीं, रांची के सांसद सह केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ (Union Minister of State for Defence Sanjay Seth) ने भ्रष्टाचार और खनिज संपदा के इस्तेमाल को लेकर सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने रोजगार के अवसरों और राज्य के संसाधनों के उपयोग पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक बदलाव (Political change) की जरूरत बतायी। सदस्यता समारोह में उमड़ी समर्थकों की भीड़ और कई लोगों के भाजपा में शामिल होने को पार्टी के लिए ईचागढ़ में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, भीड़ का चुनावी समर्थन में कितना रूपांतरण होगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। हरेलाल महतो के साथ आजसू के संगठनात्मक पदाधिकारियों के पार्टी छोड़ने के बाद अब यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि उनके समर्थक नयी राजनीतिक पारी में किस हद तक उनके साथ बने रहते हैं। हरेलाल महतो का भाजपा में शामिल होना ईचागढ़ की राजनीति में एक अहम बदलाव जरूर है, लेकिन इसकी असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी। क्या उनका राजनीतिक आधार भाजपा के संगठन को नई ताकत देगा। क्या इससे क्षेत्र में नए सियासी समीकरण बनेंगे या यह बदलाव केवल दल बदलने तक सीमित रह जायेगा। इन सवालों के जवाब भविष्य की राजनीतिक गतिविधियां देंगी। फिलहाल, ईचागढ़ में हरेलाल महतो की नई पारी ने सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है।

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