हजारीबाग:
कांग्रेस जिलाध्यक्ष जेपी पटेल ने हजारीबाग जिले में अंचल अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रसीद कटवाने और म्यूटेशन कराने के लिए लोगों को 6-6 महीने तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने उपायुक्त से अधिकारियों के कामकाज का आकलन करने और लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ नियम-संगत कार्रवाई करने की मांग की।

तीनों सीओ के काम का आकलन करने की मांग
जेपी पटेल ने कहा कि वह कई बार हजारीबाग के उपायुक्त से इस संबंध में बात कर चुके हैं। उन्होंने बड़कागांव, सदर और कटकमसांडी के अंचल अधिकारियों की कार्यशैली का आकलन करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा, "अगर कोई चीज तोड़ने-उड़ाने वाली हो, तो हम लोग जल्दी पहुंच जाते हैं। लेकिन एक आदमी को रसीद और म्यूटेशन कटवाना है, तो ये सीओ लोग 6-6 महीना दौड़ाते हैं।" विधायक ने कहा कि उन्होंने सदर और बड़कागांव अंचल से संबंधित मामलों को कई बार संज्ञान में लिया है। उन्होंने उपायुक्त से ऐसे अधिकारियों की पहचान करने की अपील की, जो अपने काम में रुचि नहीं लेते या लोगों की समस्याओं का समाधान करने में लापरवाही बरतते हैं।
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काम नहीं करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
जेपी पटेल ने कहा कि उपायुक्त को जरूरत पड़ने पर संबंधित पदाधिकारियों के काम का मूल्यांकन करना चाहिए। यदि कोई अधिकारी अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर रहा है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि निचले स्तर पर अधिकारियों के काम नहीं करने से सरकार की भी बदनामी होती है। ऐसे में सरकार से जुड़े लोगों को चाहिए कि वे लापरवाह अधिकारियों को चिन्हित कर उन्हें संबंधित पदों से हटाने की दिशा में कदम उठाएं।
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योगेंद्र साहू के बयान पर टिप्पणी से इनकार
योगेंद्र साहू के बयान से जुड़े सवाल पर जेपी पटेल ने कहा कि वह इस मामले में टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि वह यूपीए और इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं और गठबंधन के नेतृत्वकर्ताओं के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर निचले स्तर पर सरकारी कामकाज ठीक से नहीं होगा, तो इसका असर सरकार की छवि पर भी पड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार और जनता की समस्याओं के समाधान पर जोर दिया।